CM पद छोड़ने से पहले सिद्दारमैया का सियासी संदेश, जाति सर्वे से आगे बढ़ाएंगे अपनी राजनीतिक विरासत?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सिद्धारमैया अपने पीछे ऐसी विरासत छोड़ना चाहते हैं, जो उन्हें पिछड़े वर्गों के बड़े पैरोकार के रूप में स्थापित करे। साथ ही, इस फैसले का समय उन्हें एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दे का श्रेय लेने का मौका देता है, जबकि इसके लागू करने की जिम्मेदारी उनके उत्तराधिकारी पर चली जाएगी।

Siddaramaiah : कर्नाटक में मुख्यमंत्री के बदले जाने की अटकलें तेज हैं। चर्चा है कि सिद्दारमैया गुरुवार को सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं। मुख्यमंत्री पद की रेस में कांग्रेस की ओर से डीके शिवकुमार का नाम सबसे आगे है। रिपोर्टों के मुताबिक इस बदलाव के बीच सिद्दारमैया ने पिछड़ा वर्ग आयोग की सर्वे रिपोर्ट स्वीकार कर ली है। इस सर्वे रिपोर्ट को स्वीकार किया जाना एक सामान्य प्रशासनिक कदम के रूप में नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। चर्चा है कि कर्नाटक में तेजी से बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच सिद्दारमैया ने आयोग को तेजी से इस सर्वे रिपोर्ट को तैयार कर पेश करने के लिए कहा। इस सर्वे रिपोर्ट को सिद्दारमैया की एक सोची-समझी रणनीति माना जा रही है। यह सर्वे रिपोर्ट आने वाले मुख्यमंत्री के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।

Siddaramaiah

कर्नाटक के सीएम पद से इस्तीफा दे सकते हैं सिद्दारमैया।

सिद्दारमैया की प्रतिबद्धताओं में शामिल रहा है जाति सर्वे

सिद्दारमैया के लिए जाति सर्वे हमेशा से और लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक और वैचारिक प्रतिबद्धताओं में शामिल रहा है। सिद्दारमैया खुद को अहिंदा नेता के रूप में पेश करते आए हैं। वह खुद को अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों का प्रतिनिधित्व करने वाला नेता मानते हैं। सिद्धारमैया ने अपनी राजनीतिक पहचान का बड़ा हिस्सा सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों के सशक्तिकरण के मुद्दे पर खड़ा किया है। ऐसे में पद छोड़ने से पहले रिपोर्ट को स्वीकार करना उनके लिए एक मजबूत राजनीतिक संदेश देने का जरिया माना जा रहा है। इससे वह यह दिखाना चाहते हैं कि मुख्यमंत्री पद पर अपने आखिरी दिन तक भी वे उन समुदायों के हितों के प्रति प्रतिबद्ध रहे, जो उनकी अहिंदा राजनीति का मूल आधार हैं।

End of Feed