कर्तव्य पथ पर दिखेगा DRDO का यह 'घातक' हथियार, चीन-पाक के उड़ जाएंगे होश, पूरी तरह है स्वदेशी

डीआरडीओ इस मिसाइल को परेड में लॉन्चर के साथ प्रदर्शित करेगा। बयान में कहा गया कि यह हथियार प्रणाली भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित की गई है। अधिकारियों ने बताया कि यह हाइपरसोनिक मिसाइल ‘क्वासी-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र’ का अनुसरण करती है।

DRDO LRASHM Missile: इस बार 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में भारत अपने विशेष एवं उन्नत हथियारों का प्रदर्शन करेगा। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित लंबी दूरी की पोत-रोधी हाइपरसोनिक मिसाइल (एलआर-एएसएचएम) का प्रदर्शन परेड के दौरान किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बृहस्पतिवार को बताया कि एलआर-एएसएचएम एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो स्थिर और गतिमान दोनों प्रकार के लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है तथा विभिन्न प्रकार के पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन की गई है। यह स्वदेशी एवियोनिक्स प्रणालियों और उच्च सटीकता वाले सेंसर पैकेज से युक्त अपनी तरह की पहली मिसाइल है।

LRASHM

एलआरएएसएचएम हारइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है।

डीआरडीओ इस मिसाइल को परेड में लॉन्चर के साथ प्रदर्शित करेगा। बयान में कहा गया कि यह हथियार प्रणाली भारतीय नौसेना की तटीय बैटरी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित की गई है। अधिकारियों ने बताया कि यह हाइपरसोनिक मिसाइल ‘क्वासी-बैलिस्टिक प्रक्षेपवक्र’ का अनुसरण करती है, जिसमें इसकी गति मैक 10 से शुरू होकर कई चरणों में औसतन मैक 5.0 बनी रहती है।

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