इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हनीमून के दौरान मेघालय में हुई सनसनीखेज हत्या के मामले में मुख्य आरोपी पत्नी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार की याचिका पर कल यानी 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। गुरुवार को राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले का विशेष उल्लेख (मेंशनिंग) करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
सोनम की जमानत के खिलाफ मेघालय सरकार पहुंची सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह बेहद गंभीर हत्या का मामला है, जिसमें आरोपी को केवल एक तकनीकी आधार पर जमानत दे दी गई। उन्होंने अदालत से कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के आधार (Grounds of Arrest) बताए गए थे और उससे जुड़े कई दस्तावेजों पर उसके हस्ताक्षर भी हैं। केवल एक दस्तावेज में कानूनी धारा का नंबर टाइप करने में हुई त्रुटि के आधार पर जमानत देना न्यायोचित नहीं है। मेहता ने यह भी कहा कि यदि जमानत बरकरार रहती है तो सोनम रघुवंशी के फरार होने की आशंका है, इसलिए मामले में तत्काल हस्तक्षेप जरूरी है।
क्या है मेघालय सरकार का दावा?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) में मेघालय सरकार ने कहा है कि ट्रायल कोर्ट ने पहले तीन बार सोनम रघुवंशी की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। चौथी जमानत याचिका में पहली बार गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए जाने का मुद्दा उठाया गया और उसी आधार पर राहत मिल गई।
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राज्य सरकार का कहना है कि गिरफ्तारी के दिन 9 जून 2025 को सोनम रघुवंशी को गिरफ्तारी का मेमो, Grounds of Arrest, अधिकारों की सूचना, इंस्पेक्शन मेमो और अन्य दस्तावेज दिए गए थे, जिनमें से कई पर उसके हस्ताक्षर मौजूद हैं। ट्रांजिट रिमांड के दौरान गाजीपुर की अदालत के समक्ष भी पूरे दस्तावेज पेश किए गए थे और अदालत ने प्रथम दृष्टया हत्या के आरोपों को गंभीर मानते हुए ट्रांजिट रिमांड मंजूर किया था।
याचिका में यह भी कहा गया है कि 11 जून 2025 को सोहरा (मेघालय) की अदालत ने व्यक्तिगत रूप से आरोपी से बातचीत की थी। उस समय अदालत ने रिकॉर्ड किया था कि आरोपी अपनी गिरफ्तारी के कारणों से पूरी तरह अवगत है और उसके परिवार की ओर से वकील की व्यवस्था की जा रही है।
'सिर्फ टाइपिंग की गलती को बना दिया जमानत का आधार'
मेघालय सरकार का आरोप है कि जिस दस्तावेज को आधार बनाकर जमानत दी गई, उसमें केवल एक टाइपोग्राफिकल गलती थी। गिरफ्तारी मेमो में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 लिखे जाने की जगह गलती से धारा 403 अंकित हो गई थी। सरकार का कहना है कि बाकी सभी दस्तावेजों, केस डायरी, ट्रांजिट रिमांड आवेदन, एफआईआर, चार्जशीट और अदालतों के आदेशों में सही धाराएं दर्ज थीं। ऐसे में इस तकनीकी त्रुटि से आरोपी को कोई वास्तविक नुकसान नहीं हुआ और इसे जमानत का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए था।
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'हत्या पहले से रची गई साजिश का हिस्सा'
याचिका में राज्य सरकार ने दावा किया है कि जांच में हत्या एक सुनियोजित साजिश साबित हुई है। पुलिस के मुताबिक, 22 मई 2025 को राजा और सोनम शिलॉन्ग से सोहरा पहुंचे। उसी दिन तीन सह-आरोपी भी अलग-अलग स्कूटी से वहां पहुंचे। अगले दिन ट्रैकिंग के दौरान स्थानीय गाइड ने राजा और सोनम को तीन अन्य लोगों के साथ देखा था। GPS डेटा, CCTV फुटेज और डिजिटल फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस का दावा है कि सभी आरोपी घटनास्थल पर मौजूद थे।
सरकार का आरोप है कि वेई सॉडोंग पार्किंग क्षेत्र के पास राजा रघुवंशी पर पहले से खरीदे गए धारदार हथियार (दाओ) से हमला किया गया। हत्या के बाद शव को गहरी खाई में फेंक दिया गया, जबकि आरोपी मौके से फरार हो गए। पुलिस के मुताबिक, हत्या के बाद सोनम ने अपनी रेन जैकेट फेंकी, पहचान छिपाने के लिए सह-आरोपी से स्कार्फ लिया और फिर शिलॉन्ग, गुवाहाटी होते हुए मध्य प्रदेश पहुंच गई।
'फरार होने और गवाहों को प्रभावित करने का खतरा'
मेघालय सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि ट्रायल कोर्ट पहले तीन बार यह मान चुका था कि आरोपी के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत साक्ष्य हैं और उसके फरार होने या गवाहों को प्रभावित करने की आशंका है। बाद में सह-आरोपियों की जमानत याचिकाएं भी इसी आधार पर खारिज की गईं। राज्य सरकार का कहना है कि हत्या जैसे गंभीर मामले में केवल एक तकनीकी त्रुटि के आधार पर जमानत देना न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मेघालय हाईकोर्ट के 29 जून 2026 के उस फैसले को रद्द करने की मांग की है, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा गया था। अब इस मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें रहेंगी। अदालत यह तय करेगी कि सोनम रघुवंशी को मिली जमानत जारी रहेगी या उसे रद्द कर दोबारा न्यायिक हिरासत में भेजा जाएगा।
