'बेटी, पत्नी या मां... यही पहचान क्यों?' मनुस्मृति पर भी बरसे राहुल गांधी, 'छात्रों की गूंज' में दिया 'ब्रेक द केज' का नारा

पुणे के एआईएसएसएमएस कॉलेज में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने मनुस्मृति और महिलाओं के खिलाफ हिंसा पर तीखा हमला बोला।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे के एआईएसएसएमएस (AISSMS) कॉलेज में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में शिरकत की। कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने छत्रपति राजर्षि शाहू महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद युवाओं और महिलाओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने देश में महिलाओं की स्थिति, सुरक्षा और उनके अधिकारों पर खुलकर बात की। इस शाम का मुख्य विषय 'ब्रेक द केज' (पिंजरा तोड़ो) रखा गया था, जिसके जरिए उन्होंने महिलाओं को अपनी व्यक्तिगत पहचान बनाने के लिए प्रेरित किया।

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पुणे में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को राहुल गांधी ने किया संबोधित (फोटो: X/@RahulGandhi)

संबोधन के दौरान राहुल गांधी ने मनुस्मृति का हवाला देते हुए उस पर गहरा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि मनुस्मृति में लिखा गया है कि बचपन में स्त्री अपने पिता के अधीन, युवावस्था में पति के और पति की मृत्यु के बाद अपने बेटों के अधीन रहती है, तथा महिला को कभी स्वतंत्र नहीं होना चाहिए। राहुल ने इन पंक्तियों की सख्त आलोचना करते हुए कहा कि ये शब्द बेहद शर्मनाक हैं और ऐसे विचार कभी नहीं बोले जाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि पुरुषों द्वारा महिलाओं को सिर्फ बेटी, पत्नी या मां के तीन दायरों में बांधकर देखा जाता है, जबकि आज की महिलाएं खेल, पेशेवर क्षेत्रों और विभिन्न पेशों में अपनी अलग मिसाल कायम कर रही हैं।

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