Congress Bharat Jodo Yatra: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में चल रही भारत जोड़ो यात्रा, राजनीतिक रूप से सबसे अहम सूबे उत्तर प्रदेश में पहुंच गई है। 80 लोक सभा सीटों वाले उत्तर प्रदेश से कांग्रेस पार्टी के 4 नेता प्रधानमंत्री पद तक पहुंचे हैं। यही नहीं भारतीय राजनीति की कहावत है कि जिसका यूपी उसके पास दिल्ली की कुर्सी और शायद यही कारण है कि जब मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिल्ली की सत्ता की उम्मीद लगाई तो उन्होंने गुजरात की जगह यूपी के काशी को चुनाव के लिए चुनना पड़ा। ऐसे में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का यूपी में महज 3 दिन बिताना और केवल 3 जिलों तक सीमित रखना, कांग्रेस की रणनीति पर सवाल उठाता है। क्या उत्तर प्रदेश में हाशिए पर पहुंच चुकी कांग्रेस पार्टी ने भाजपा के खिलाफ ,सपा-बसपा को खुला मैदान दे दिया है।
कांग्रेस भारत जोड़ो यात्रा यूपी पहुंची
यूपी में बेहद कम समय
भारत जोड़ो यात्रा अभी तक पिछले 109 दिनों में 10 राज्य और 47 जिले को कवर कर चुकी है। इसमें सबसे ज्यादा राहुल गांधी का फोकस दक्षिण भारत के राज्य रहे हैं। केरल में यात्रा 18 दिन, कर्नाटक में 21 दिन, तेलंगाना में 13 दिन, महाराष्ट्र में 16 दिन फिर राजस्थान में 21 दिन और फिर मध्य प्रदेश में 16 दिन तक चलती रही। वहीं अगर यूपी की बात की जाय तो 75 जिलों वाले प्रदेश में राहुल गांधी केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तीन जिलों गाजियाबाद, शामली और बागपत से ही गुजरेंगे।
कांग्रेस को मिले 4 प्रधानमंत्री, गांधी परिवार का मजूबत नाता
इसी तरह अगर यूपी और कांग्रेस का रिश्ता देखा जाय तो पार्टी से देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू, दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, राहुल गांधी की दादी श्रीमती इंदिरा गांधी और राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी यूपी से चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बने हैं। इसके अलावा खुद राहुल गांधी का करियर भी यूपी के अमेठी से ही शुरू हुआ। हालांकि वह 2019 में लोक सभा चुनाव हार गए थे। जबकि उनकी मां सोनिया गांधी रायबरेली से ही सांसद हैं। यही नहीं उनकी बहन प्रियंका गांधी ने भी पहली बार चुनावी कमान उत्तर प्रदेश में भी संभाली। हालांकि 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस उनके नेतृत्व में सबसे खराब प्रदर्शन कर बैठी।
क्या अखिलेश-मायावती के लिए छोड़ा रास्ता
वैसे तो राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती और राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख जयंत चौधरी को भी न्यौता भेजा था। लेकिन उनमें से कोई पहुंचा नही, किसी ने व्यस्तता को वजह बताया तो किसी ने शुभकामना संदेश भेजा। जाहिर है कि राहुल गांधी को यूपी में दक्षिण के दूसरे दल के नेताओं के तरह कोई समर्थन देने नहीं पहुंचा। जिस तरह यूपी जैसे राज्य में केवल 3 दिन और 3 जिलों तक सीमित रह कर आगे बढ़ने की तैयारी में हैं, उससे यह तो साफ लगता है कि राज्य में हाशिए पर पहुंच चुकी पार्टी को यात्रा से बड़ा बूस्ट नहीं मिलने वाला है। अब देखना है कि इसके लिए राहुल यात्रा खत्म होने के बाद किस रणनीति से आगे बढ़ते हैं।
