ओडिशा के राज्यपाल के पद से छह माह पहले इस्तीफा देकर सक्रिय राजनीति में लौटे रघुवर दास को झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद का दायित्व मिल सकता है। वर्ष 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त के बाद से पार्टी के भीतर राज्य में नए नेतृत्व के विकल्पों पर चल रही चर्चा पर अब विराम लगने की संभावना है।
रघुवर दास
बाबूलाल मरांडी ने दोनों मुलाकातों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हुए खुद इसकी तस्दीक की। उन्होंने शुक्रवार की शाम अमित शाह से मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री आदरणीय अमित शाह से मुलाकात हुई। इस दौरान प्रदेश एवं संगठन से जुड़े विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा हुई।”
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दिल्ली से लौटने के बाद मरांडी रविवार को इंटरसिटी ट्रेन से रांची से दुमका पहुंचे और इसके बाद वहां सर्किट हाउस में रघुवर दास के साथ उनकी मुलाकात हुई। मरांडी ने बताया कि रघुवर दास से पार्टी के संगठनात्मक कार्यों पर चर्चा हुई। रघुवर दास ने दो दिनों से संथाल परगना में सीएम हेमंत सोरेन के इलाके में कैंप कर रखा है। उन्होंने रविवार को हेमंत सोरेन के विधानसभा क्षेत्र बरहेट में “जन चौपाल” भी लगाई। वह पिछले दो महीने से राज्य के विभिन्न इलाकों का दौरा कर पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं और आमजन से मुलाकात कर रहे हैं। जिलों में स्थानीय स्तर पर पार्टी के कार्यक्रमों में वह हेमंत सोरेन की सरकार पर हमलावर भी हैं।
रघुवर दास के इन दौरों और कार्यक्रमों को राज्य में पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं और समर्थकों को नए सिरे से एकजुट करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है। यह भी माना जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से संकेत मिलने के बाद ही रघुवर इस तरह सक्रिय हुए हैं। भाजपा के मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को पार्टी ने हाल में संपन्न हुए विधानसभा के बजट सत्र के दौरान नेता प्रतिपक्ष का दायित्व सौंपा है। यह तय है कि वह इस पद के साथ प्रदेश अध्यक्ष की दोहरी जिम्मेदारी में नहीं रहेंगे। प्रदेश नेतृत्व संभालने के लिए रघुवर दास को एक बार फिर से आगे करने की तैयारी है। वह पहले भी दो बार झारखंड प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं।
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी वह संगठन में सक्रिय रहे हैं। उनकी पहचान राज्य में पार्टी के सबसे बड़े ओबीसी लीडर के तौर पर रही है। वह राज्य के एकमात्र ऐसे मुख्यमंत्री भी रहे, जिन्होंने झारखंड में वर्ष 2014 से 2019 तक पूरे पांच साल भाजपा की सरकार चलाई।
