पश्चिम एशिया की स्थिति पर राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान पर विपक्ष ने निशाना साधा है। विपक्षी दलों खास तौर पर कांग्रेस ने तीखा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री के संबोधन को 'खुद की तारीफ से भरा तैयार भाषण'करार दिया। साथ ही और कई मुद्दों पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश और पीएम मोदी।
कांग्रेस महासचिव (संचार)जयराम रमेश ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में करीब 20 मिनट तक पश्चिम एशिया पर अपनी बात रखी,लेकिन विपक्ष को किसी भी तरह का स्पष्टीकरण मांगने का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाषण पहले से तैयार किया गया था और इसमें पिछले 11 वर्षों की उपलब्धियों का बखान किया गया।
केंद्र लगातार राज्यों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर कर रही
जयराम रमेश ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा राज्यों से सहयोग की अपील करना 'विरोधाभासी'है,क्योंकि उनके अनुसार केंद्र सरकार लगातार राज्यों के संवैधानिक अधिकारों को कमजोर कर रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने प्रवासी मजदूरों की सुरक्षा की बात की,जबकि मनरेगा जैसी योजनाओं को कमजोर किया गया,जो कोविड-19 के दौरान श्रमिकों के लिए सहारा बनी थीं।
हमारी विदेश नीति विफल हुई-राजीव शुक्ला
वहीं,कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने राज्यसभा में प्रधानमंत्री के बयान पर कहा कि उन्होंने चिंता जाहिर की है कि यह संकट बढ़ने वाला है। हम शुरू से कहते आए हैं कि यह संकट बढ़ने वाला है और हमें इसके पुख्ता इंतजाम करने चाहिए। हमारी विदेश नीति विफल हुई है,आज तक ईरान या किसी देश ने हमारे जहाज नहीं रोके थे,कोई संकट नहीं होने दिया। हम किसी गुट में नहीं थे। आज जो संकट है वह विदेश नीति में गड़बड़ी की वजह से है।
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने बयान में कहा था कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट गहराया है। उन्होंने बताया कि सरकार ने ईंधन,आपूर्ति श्रृंखला और उर्वरकों जैसे क्षेत्रों में रणनीति बनाने के लिए सात सशक्त समूहों का गठन किया है।
उन्होंने राज्य सरकारों से अपील की कि वे जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाएं। साथ ही, यह भी कहा कि सरकार विभिन्न स्रोतों से कच्चा तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास कर रही है और उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता के लिए तैयारी कर ली गई है।
