जाति जनगणना कब शुरू होगी, कब तक पूरी होगी और इसका आंकड़ा कब तक देश के सामने आएगा? ये सवाल विपक्षी दलों द्वारा उठाया जा रहा है। कांग्रेस ने कहा है कि जाति आधारित गणना के लिए सरकार ने समय सीमा नहीं बताई। वहीं एआईएमआईएम प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, 'केरल में आरएसएस की बैठक हुई थी, उस बैठक में भी उन्होंने जाति जनगणना कराने की बात कही थी। हम जानना चाहते हैं कि सरकार जनगणना कब शुरू करेगी और यह कब पूरी होगी और इसका डेटा देश के सामने कब पेश किया जाएगा।'
विपक्षी दलों ने सरकार से पूछा- कब शुरू होगी जाति जनगणना?
ओवैसी ने सरकार से पूछा- कब शुरू होगी जाति जनगणना?
आप जाति जनगणना का फैसला ले लिए, केरल में आरएसएस की बैठक हुई थी उस बैठक में भी उन्होंने कहा था कि जाति जनगणना कराना चाहिए। भाजपा और भारत सरकार से हम एक ही बात पूछ रहे हैं कि आप जनगणना कब शुरू करेंगे? क्योंकि आपने जाति जनगणना कराने का फैसला लिया। जनगणना कब शुरू होगी, ये प्रक्रिया कब पूरी होगी, उसका डेटा देश के सामने कब आएगा? क्या साल 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले ये हो जाएगा या नहीं हो पाएगा? 1931 में जाति जनगणना हुई थी, उसके बाद से अब तक नहीं हुई। आपको मालूम होना चाहिए न, कौन कहां खड़ा है और कितना पिछड़ा है। किस जाति में कम पढ़े लिखे हैं, किसके पास जमीन नहीं है, किसके पास कितनी आमदनी है, कौन किराये के घर में रहता है, किसके पास खेती के लिए जमीन नहीं है। ऐसे कई सवाल होंगे।
'सरकार ने खबर का शीर्षक दिया, लेकिन समय सीमा नहीं बताई'
कांग्रेस ने आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के फैसले की घोषणा के बाद बृहस्पतिवार को सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 'बिना समय सीमा के सुर्खियां बनाने में माहिर हैं'। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि इस फैसले को लेकर कई सवाल उठते हैं, खासकर सरकार की मंशा पर। उन्होंने मांग की कि जनगणना जल्द से जल्द होनी चाहिए। पार्टी के 24, अकबर रोड स्थित कार्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए रमेश ने कहा कि वह 'बिना समय सीमा के सुर्खियां बनाने में माहिर हैं।'
आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाने की मांग करते हुए रमेश ने पूछा कि मोदी सरकार को ऐसा करने से कौन रोक रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि संविधान में संशोधन किया जाना चाहिए और आरक्षण पर 50 प्रतिशत की सीमा को हटाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जातिगत जनगणना तभी सार्थक होगी जब ऐसा किया जाएगा। रमेश ने दिसंबर 2019 की एक मंत्रिमंडल बैठक की प्रेस विज्ञप्ति का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 8,254 करोड़ रुपये की लागत से 2021 में भारत की जनगणना कराने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। उन्होंने कहा कि उस प्रेस विज्ञप्ति में जाति आधारित गणना का कोई उल्लेख नहीं था। कांग्रेस नेता ने कहा, 'हर कोई जानता है कि यह जनगणना नहीं हुई है और छह साल बीत चुके हैं। हैरानी की बात है कि सरकार ने कल इसकी घोषणा की।' रमेश ने सरकार से जातिगत जनगणना के लिए देश के सामने एक रोडमैप प्रस्तुत करने का आग्रह किया।
सरकार के फैसले के बाद कल होगी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक
आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के सरकार के फैसले पर चर्चा के लिए कांग्रेस कार्यसमिति की शुक्रवार को एक बैठक होगी। सूत्रों ने यह जानकारी दी। केंद्र ने बुधवार को घोषणा की कि जातिगत गणना अगली जनगणना का हिस्सा होगी, जिसमें आजादी के बाद पहली बार जातियों का विवरण शामिल किया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि सरकार के फैसले और आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए शुक्रवार को पार्टी के 24, अकबर रोड स्थित कार्यालय में शाम 4 बजे कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक होगी। पहलगाम आतंकी हमले के मद्देनजर पिछले सप्ताह 24 अप्रैल को भी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक हुई थी।
जाति जनगणना पर सरकार के फैसले के बाद सियासी पारा हाई।
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि वह सरकार द्वारा '11 साल तक विरोध' करने के बाद आगामी जनगणना में जातिगत गणना को शामिल करने के 'अचानक' लिए गए फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि केंद्र को इसके कार्यान्वयन के लिए समयसीमा बतानी चाहिए। जातिगत जनगणना पर सरकार की घोषणा के लिए कांग्रेस द्वारा चलाए गए निरंतर अभियान को श्रेय देते हुए राहुल ने कहा कि अभी तो उन्हें यह संदेह है कि कार्यान्वयन के मामले में यह फैसला महिला आरक्षण विधेयक की राह पर जा सकता है। उन्होंने इसके लिए सरकार से एक विशिष्ट तारीख बताने की मांग की। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि यह स्पष्ट है कि जातिगत जनगणना के लिए कांग्रेस ने सरकार पर जो दबाव बनाया था, वह काम कर गया है।
बिहार, तेलंगाना, कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने किए हैं सर्वेक्षण
कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल देश भर में जाति आधारित जनगणना कराने की मांग कर रहे हैं और इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बना रहे हैं। बिहार, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों ने इस संबंध में सर्वेक्षण किए हैं। राजनीतिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति (सीसीपीए) द्वारा लिए गए फैसले की घोषणा करते हुए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि जनगणना केंद्र के अधिकार क्षेत्र में आती है, लेकिन कुछ राज्यों ने सर्वेक्षण के नाम पर ‘गैर-पारदर्शी’ तरीके से जातिगत गणना की है, जिससे समाज में भ्रम पैदा हुआ है।
'पहलगाम आतंकवादी हमले से लोगों का ध्यान भटकने की कोशिश'
आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने जातिवार जनगणना को पहलगाम आतंकवादी हमले की घटना से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा अपनाया गया हथकंडा करार देते हुए दावा किया कि बिहार विधानसभा चुनाव होते ही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार जातिवार जनगणना को भूल जाएगी। उन्होंने कहा, ' पूरा देश इंतजार कर रहा था कि आप (सरकार) पीओके (पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर) को वापस लेने के लिए किस तरह से हमला करेंगे । आतंकवादियों को नेस्तनाबूद करने के लिए क्या करेंगे। पहलगाम में 26 निहत्थे और निर्दोष पर्यटक मारे गए और हमारी धरती पर आकर आतंकवादियों ने हमें चुनौती देने का काम किया है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के खिलाफ आप क्या कार्रवाई करेंगे। ऐसे समय में सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए आप (सरकार) जातिवार जनगणना का विषय ले आए।'
उन्होंने कहा, 'हम जातिवार जनगणना के खिलाफ नहीं हैं। हम लोग शुरू से जातिवार जनगणना कराने की बात करते हैं, मगर आप (सरकार) ऐसे समय में जाति जनगणना लेकर आए हैं जिससे पाकिस्तान द्वारा समर्थित आतंकवाद की घटना से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके। जनता आपसे सवाल न पूछे।' सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार ने जातिवार जनगणना की घोषणा तो कर दी लेकिन यह नहीं बताया कि यह काम कितने समय में पूरा होगा। उन्होंने इसे बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर की गई कोरी घोषणा बताते हुए कहा, 'सरकार ने महिला आरक्षण विधेयक पारित किया लेकिन इस आरक्षण को लागू करने की दिशा में एक इंच भी कार्रवाई नहीं हुई। उसी तरह सरकार जातिवार जनगणना की घोषणा कर रही है। उसके लिए ना तो बजट का आवंटन किया गया है और ना ही यह बताया जा रहा है कि कितने समय में यह जनगणना पूरी की जाएगी।' सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा, 'सच्चाई यह है कि जब बिहार का विधानसभा चुनाव खत्म हो जाएगा तो सरकार जातिवार जनगणना को भी भूल जाएगी। यह सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश है।'
