Varanasi Floods: प्रधानमंत्री मोदी ने आज वाराणसी के महापौर और जिलाधिकारी से बात कर शहर में बाढ़ की स्थिति का जायजा लिया। सरकारी सूत्रों ने बताया कि वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से सांसद मोदी को वहां बाढ़ से निपटने के लिए किए जा रहे राहत कार्यों की जानकारी दी गई। प्रधानमंत्री ने दोनों अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि लोगों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े। वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर बुधवार को चेतावनी स्तर को पार कर गया था। इसके बाद जिला प्रशासन ने सभी नावों के संचालन पर रोक लगा दी थी और बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ा दी थी।
पीएम मोदी ने की वाराणसी के डीएम और मेयर से बात
घाटों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील
प्रशासन ने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों से घाटों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की है। अधिकारियों ने बताया कि गंगा और वरुणा नदियों के बढ़ते जलस्तर के साथ-साथ जलभराव और वरुणा नदी के किनारे के इलाकों में बाढ़ की स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर रख रहा है। अधिकारियों के अनुसार जिले में 13 राहत शिविर बनाए गए हैं, जहां बुधवार तक प्रभावित 219 परिवारों के 935 लोग रह रहे थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के महापौर (मेयर) अशोक तिवारी और जिलाधिकारी (DM) सत्येंद्र कुमार से फोन पर बातचीत कर शहर में बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों का जायजा लिया। सरकारी सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रभावित नागरिकों को कम से कम असुविधा हो और सभी आवश्यक राहत सामग्री तुरंत उपलब्ध कराई जाए।
गंगा और वरुणा नदियों के उफान से बिगड़े हालात
वाराणसी में लगातार पानी बढ़ने के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, वाराणसी में गंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु (70.262 मीटर) को पार कर 70.54 मीटर तक पहुंच गया है, जो तेजी से खतरे के निशान (71.262 मीटर) की ओर बढ़ रहा है। गंगा में उफान और तेज धारा को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी प्रकार की नौकाओं के संचालन पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
घाट और गलियां जलमग्न
गंगा और उसकी सहायक वरुणा नदी का पानी तटीय इलाकों में प्रवेश कर गया है। अस्सी घाट, मणिकर्णिका घाट और हरिश्चंद्र घाट जैसे प्रमुख स्थान पानी में डूब चुके हैं। यहां तक कि मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर शवदाह के लिए लोगों को छतों और ऊंची गलियों का सहारा लेना पड़ रहा है। गंगा आरती का स्थान बदला: घाटों के डूब जाने के कारण प्रसिद्ध गंगा आरती को भी सांकेतिक रूप से घाट के ऊपरी हिस्सों में कराया जा रहा है।
राहत और बचाव कार्य तेज
जिला प्रशासन ने शहर के निचले इलाकों के 11 वार्डों और 328 से अधिक प्रभावित परिवारों के लिए 13 बाढ़ राहत शिविर बनाए हैं, जहां सैकड़ों लोग शरण लिए हुए हैं। एनडीआरएफ, जल पुलिस और स्थानीय प्रशासन को प्रभावित इलाकों में लगातार गश्त करने और जरूरतमंदों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।
खास ध्यान देने के निर्देश: राहत शिविरों में भोजन, शुद्ध पेयजल, चिकित्सा जांच, एंटी-लार्वा छिड़काव और सुरक्षा के लिए सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की व्यवस्था की गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और स्थानीय प्रशासन वाराणसी में गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर पर लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
