राजधानी नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात की। पश्चिम एशिया में जारी कूटनीतिक उथल-पुथल और अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए नए आर्थिक प्रतिबंधों के बीच यह बैठक बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। खास बात यह है कि बीते दो हफ्तों से भी कम समय में दोनों नेताओं के बीच यह दूसरी सीधी मुलाकात है।
पीएम मोदी से मुलाकात के बाद गदगद हुए ईरानी राष्ट्रपति (फोटो: X/@narendramodi)
ईरानी राष्ट्रपति के रूप में मसूद पेजेश्कियान की यह पहली भारत यात्रा है। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स से जुड़ी बैठकों और बिजनेस फोरम में ईरान की निरंतर और उच्चस्तरीय भागीदारी के लिए राष्ट्रपति पेजेश्कियान का आभार व्यक्त किया। पीएम मोदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद ईरान का ब्रिक्स के कार्यक्रमों में लगातार शामिल होना इस मंच की मजबूती को दर्शाता है।
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केवल संवाद से ही हो सकता है समाधान-पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि ब्रिक्स 'ग्लोबल साउथ' के देशों में आपसी सहयोग, स्थिरता और नवाचार को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रहा है।द्विपक्षीय वार्ता के दौरान पश्चिम एशिया के मौजूदा बिगड़ते हालातों पर गंभीर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के स्पष्ट रुख को दोहराते हुए कहा कि क्षेत्र से जुड़े किसी भी विवाद या मुद्दे का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के जरिए ही निकाला जा सकता है। उन्होंने क्षेत्र में दीर्घकालिक शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों द्वारा मिलकर प्रयास किए जाने की जरूरत पर बल दिया।
क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम मुलाकात
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय तनाव के कारण लाल सागर और आसपास के समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही और वाणिज्य प्रभावित नहीं होना चाहिए। पीएम मोदी ने जहाजों पर तैनात नाविकों (सीफेरर्स) की सुरक्षा और उनके कल्याण को प्राथमिकता देने की बात कही। दोनों नेताओं की यह लगातार हो रही मुलाकातें भारत और ईरान के बीच मजबूत होते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को दर्शाती हैं, जो क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा की दृष्टि से बेहद अहम हैं।
