प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को 20,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की लागत वाली आठ रेलवे परियोजनाओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी का स्वागत किया। उन्होंने कहा इनसे बेहतर कनेक्टिविटी, यात्रियों की तेज़ आवाजाही और लॉजिस्टिक्स की लागत में कमी सुनिश्चित होगी।मंत्रिमंडल ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना के 17 ज़िलों में फैली पांच मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंज़ूरी दी, जिससे भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 540 किलोमीटर बढ़ जाएगा। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है।
PM मोदी बोले-'मजबूत कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी'
मंत्रिमंडल ने पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 ज़िलों में फैली तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को भी मंजूरी दी, जिससे भारतीय रेलवे का मौजूदा नेटवर्क लगभग 656 किलोमीटर बढ़ जाएगा। इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 10,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा लागत वाली पांच बड़ी रेलवे परियोजनाएं दक्षिण भारत में बेहतर रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेंगी।'X' पर एक पोस्ट में उन्होंने कहा, 'इससे लाखों लोगों को फायदा होगा। कैबिनेट के आज के फैसले से यात्रियों की तेज़ी से आवाजाही, मज़बूत कनेक्टिविटी और माल ढुलाई की अतिरिक्त क्षमता सुनिश्चित होगी।'
मोदी ने कहा कि 10,500 करोड़ रुपये से ज़्यादा लागत वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं के बारे में कैबिनेट का फैसला अतिरिक्त रेलवे नेटवर्क सुनिश्चित करेगा और छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं पर्यटन, खासकर हेरिटेज और वाइल्डलाइफ़ से जुड़े पर्यटन को बढ़ावा देंगी और लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करेंगी।
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9 राज्यों के 20 से ज्यादा जिलों में 8 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने बुधवार को रेल मंत्रालय के आठ प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी, जिनकी कुल लागत 20,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा है। इन प्रोजेक्ट्स में खड़गपुर-झारसुगुड़ा और कटनी-पेंड्रा रोड सेक्शन के बीच चौथी लाइन का निर्माण, और साथ ही बिलासपुर (उस्लापुर)-पेंड्रा रोड सेक्शन के बीच तीसरी लाइन का निर्माण शामिल है।
लाइन की क्षमता बढ़ने से आवाजाही बेहतर होगी
बाकी 3 प्रोजेक्ट्स में अरक्कोणम-रेनिगुंटा और व्हाइटफील्ड-बंगारपेट के बीच तीसरी और चौथी लाइन बिछाना, और सिकंदराबाद (घाटकेसर)-काजीपेट सेक्शन में मल्टी-ट्रैकिंग का काम शामिल है।मौजूदा सिंगल लाइनों को डबल करने के लिए दो और सेक्शन - होसुर-ओमालुर और सलेम-करूर-डिंडीगुल - की पहचान की गई है। लाइन की क्षमता बढ़ने से आवाजाही बेहतर होगी, जिससे भारतीय रेलवे की ऑपरेशनल क्षमता और सर्विस की विश्वसनीयता में सुधार होगा। एक प्रेस नोट में कहा गया है कि मल्टी-ट्रैकिंग के इन प्रस्तावों से कामकाज सुचारू होगा और भीड़भाड़ कम होगी।
मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स की क्षमता बढ़ाने पर जोर
ये प्रोजेक्ट PM-गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत प्लान किए गए हैं। इनमें इंटीग्रेटेड प्लानिंग और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत के जरिए मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स की क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि ये प्रोजेक्ट लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही के लिए आसान कनेक्टिविटी देंगे। पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना राज्यों के 20 से ज़्यादा ज़िलों में फैले ये प्रोजेक्ट भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 1,200 किलोमीटर तक बढ़ा देंगे।सरकार के अनुसार, प्रस्तावित मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स से 6,900 से ज़्यादा गांवों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिनकी आबादी 1 करोड़ से ज़्यादा है।
