पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर चर्चा के लिए आयोजित संसदीय स्थायी समिति (विदेश मामले) की बैठक में सरकार को विपक्ष के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। विदेश मंत्रालय (MEA) के अधिकारियों से विपक्षी सदस्यों ने भारत की कूटनीतिक नीति, संवेदनात्मक प्रतिक्रिया और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए।
पार्लियामेंट (फाइल फोटो)
बैठक में सबसे बड़ा मुद्दा यह रहा कि भारत ने हालिया घटनाओं पर औपचारिक संवेदना क्यों व्यक्त नहीं की। विपक्ष ने इसे विदेश नीति में संभावित “बड़े बदलाव” के रूप में देखते हुए पूछा कि क्या सरकार ने अपने दूतावासों को संवेदना व्यक्त न करने के निर्देश दिए थे।
प्रधानमंत्री की प्रस्तावित/हालिया इज़राइल यात्रा के समय को लेकर भी सवाल उठे। विपक्षी सदस्यों ने पूछा कि क्या मौजूदा तनावपूर्ण हालात में इस यात्रा का समय उचित है।
अमेरिकी भूमिका और समुद्री सुरक्षा पर सवाल
बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि क्या अमेरिकी युद्धपोत भारतीय कच्चे तेल के जहाजों को सुरक्षा दे रहे हैं। इस पर स्पष्ट स्थिति जानने की मांग की गई, खासकर तब जब क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा एक बड़ी चिंता बनी हुई है।
ईरान पर अधूरे जवाब
ईरान से जुड़े सवालों पर चर्चा के दौरान विदेश सचिव की अनुपस्थिति खली। विपक्ष ने ईरान में भारतीयों की स्थिति, कूटनीतिक संवाद और भविष्य की रणनीति पर विस्तृत जानकारी मांगी, लेकिन अधिकारियों ने स्वीकार किया कि सभी सवालों के जवाब फिलहाल नहीं दिए जा सकते। उन्होंने आश्वासन दिया कि विस्तृत जानकारी लिखित रूप में दी जाएगी।
भारतीयों की सुरक्षा: 1000 अब भी फंसे
विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि ईरान में लगभग 9000 भारतीय नागरिक मौजूद थे, जिनमें से करीब 8000 को सुरक्षित निकाला जा चुका है। हालांकि, अब भी लगभग 1000 भारतीय वहां फंसे हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या मेडिकल छात्रों की है, जिन्होंने स्वेच्छा से वहीं रहने का निर्णय लिया है। कई नागरिकों को पड़ोसी देशों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाला गया।
ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के संकेत
बैठक में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंता जताई गई। अधिकारियों के अनुसार, मौजूदा हालात के कारण करीब 22 जहाज फंसे हुए हैं, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
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