संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वाले सारे घुसपैठियों का लिंक भगत सिंह फैन क्लब नाम के सोशल मीडिया पेज से निकला है। पुलिस सूत्रों की ओर से यह जानकारी देते हुए समाचार एजेंसी एएनआई को आगे बताया गया कि वे सभी कर्नाटक के बेंगलुरू में लगभग डेढ़ साल पहले मिले थे।
सागर शर्मा जुलाई में उत्तर प्रदेश के लखनऊ से आया था, पर वह सदन के अंदर नहीं गया था। 10 दिसंबर, 2023 को एक-एक कर के ये सभी अलग-अलग सूबों से दिल्ली पहुंचे थे। फिर ये इंडिया गेट के पास मिले थे, जहां इन्होंने आपस में रंगीन धुआं फैलाने वाले कैन बांटे थे।
हालांकि, पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इनमें से मास्टरमाइंड कौन है। पुलिस के आलाधिकारी इनसे लगातार पूछताछ कर रहे हैं, पर शुरुआती जांच-पड़ताल के हिसाब से ऐसा लगता है कि असल साजिशकर्ता कोई और है।
ऐसा बताया गया कि शर्मा लेफ्ट की विचारधारा से प्रभावित था। वह दो फेसबुक अकाउंट्स पर इसी से जुड़े पोस्ट करता था और उन्हें शेयर कर कमेंट भी करता था। वैसे, सागर के दोनों अकाउंट्स कुछ महीनों से एक्टिव नहीं थे। उसके फेसबुक पेज से पता चला कि सोशल मीडिया मंच के जरिए वह पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, राजस्थान और हरियाणा के कई लोगों के संपर्क में था।
उधर, सागर के परिवार वालों ने अपने घर को लॉक कर लिया है और वे अनजान लोकेशन पर जा चुके हैं। उसके परिवार में पिता-मां और छोटी बहन है। वे लोग मूल रूप से यूपी के उन्नाव जिला (कानपुर से सटे) के रहने वाले हैं, जबकि लखनऊ में वे किराए पर करीब 20 साल से रह रहे हैं।
उसके परिजनों का कहना है कि वह कुछ दिन पहले "दिल्ली में विरोध प्रदर्शन" में भाग लेने के लिए घर से निकला था, हालांकि, संसद में हुई घटना में उसकी संलिप्तता के इरादे के बारे में कुछ भी नहीं जानते थे।
सागर सहित दो व्यक्ति शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए थे। उसने पीले रंग का धुंआ छोड़ा था और सांसदों की ओर से पकड़े जाने से पहले नारे लगाए थे। वैसे, दोनों प्रदर्शनकारियों के साथ इस मामले में कुल पांच लोग दिल्ली पुलिस की ओर से पकड़े जा चुके हैं।
