Asaduddin Owaisi News : SIR पर जारी विवाद के बीच ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार पर हमला बोला है। ओवैसी ने शनिवार को आरोप लगाते हुए कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण से जरिए सरकार 'पिछले दरवाजे से NRC' ला रही है और SIR के बाद बने मतदाता सूची का इस्तेमाल नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (एनआरसी) को लागू करने में किया जा सकता है।
एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी।
ओवैसी ने चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विपक्षी दलों के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अन्य दलों के साथ 'कंधे से कंधा मिलाकर' खड़ा होना है या नहीं, इसका फैसला भविष्य में किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने SIR प्रक्रिया के विरोध को दोहराया।
कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे या नहीं, यह भविष्य की बात-ओवैसी
ओवैसी ने ANI से कहा, 'हम कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होंगे या नहीं, यह भविष्य की बात है। लेकिन हम शुरुआत से ही कहते आए हैं कि SIR ‘बैकडोर NRC’ है। मैं फिर दोहराता हूं कि देश के गृह मंत्री ने एक आयोग का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर रहे हैं। इस आयोग को उन क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय बदलावों की जांच करने का जिम्मा दिया गया है, जहां अंतिम NRC लागू किया गया था। गृह मंत्री ने कहा है कि वे अंतिम NRC सूची की समीक्षा करेंगे।'
'NRC लागू करने में मतदाता सूची को आधार बनाएगी सरकार'
उन्होंने आगे कहा, 'इसका क्या मतलब है? यह हमारी इस बात को साबित करता है कि यह बैकडोर NRC है। देर-सबेर यह सरकार NRC लागू करेगी और इसी मतदाता सूची को उसका आधार बनाएगी। आपको फिर से कतार में खड़ा होना पड़ेगा और दस्तावेज पेश करने के लिए कहा जाएगा। इससे लोगों को बहुत परेशानी हो रही है। मेरे अपने निर्वाचन क्षेत्र में मैं ऐसे लोगों को देख रहा हूं, जिनके नाम सूची से गायब हैं और जिन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।'
रिपोर्ट के बाद एकजुट हो रहा विपक्ष
ओवैसी का यह बयान चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को लेकर 10 महीनों में कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। इस बीच, वाम दल और तृणमूल कांग्रेस (TMC) चुनाव आयोग के कामकाज और SIR प्रक्रिया के मुद्दे पर विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और TMC प्रमुख ममता बनर्जी ने हुगली में एक रैली को संबोधित करते हुए ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल पश्चिम बंगाल को निशाना बनाने के लिए किया गया है।
