च्वाइस-मूलभूत अधिकारों पर राय अलग, हिजाब मामले में दोनों जजों की खास टिप्पणी

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  • Updated Oct 13, 2022, 12:35 PM IST

कर्नाटक हिजाब विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच ने फैसला तो सुनाया लेकिन एक दूसरे की राय अलग थी। यहां हम बताएंगे कि फैसला सुनाते हुए जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस हेमंत गुप्ता ने क्या टिप्पणी की।

कर्नाटक हिजाब मामले को सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की बेंच ने बड़ी बेंच के हवाले करने का फैसला किया है। इस मामले में दोनों जजों की राय बंटी हुई थी। जस्टिस सुधांशु धूलिया ने कहा कि लड़कियों के लिए शिक्षा जरूरी है, इसके साथ ही उनके च्वाइस का भी सम्मान करना चाहिए तो दूसरे जस्टिस हेमंत गुप्ता ने कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि क्या हिजाब मूलभूत अधिकार है उसे समझने की जरूरत है। अदालत के सामने जब सालिसिटर जनरल से फ्रांस का उदाहरण दिया तो जस्टिस धूलिया ने कहा कि वहां सार्वजनिक जगहों पर आप धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल नहीं कर सकते वहीं भारत में धर्मनिरपेक्षता का स्वरूप अलग है।

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हिजाब मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के दोनों जजों की बंटी राय

जस्टिस सुधांशु धूलिया की टिप्पणी

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