Winter Session: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि देश भर में करीब 18 लाख एकड़ जमीन रक्षा भूमि है, जिसमें से करीब 11,152 एकड़ पर अतिक्रमण है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में यह जानकारी दी। रक्षा मंत्रालय से इस बारे में राज्यवार जानकारी मांगी गई थी कि देश भर में अभी कितनी रक्षा भूमि ऐसी है जिसका वर्तमान में उपयोग नहीं किया जा रहा, जिस पर अतिक्रमण है या मुकदमे लंबित हैं।
संसद का शीतकालीन सत्र (फाइल फोटो)
संजय सेठ ने कहा, ‘‘देश भर में करीब 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि में से करीब 11,152 एकड़ पर अतिक्रमण है।’’ सेठ ने कहा कि रक्षा भूमि का उपयोग वास्तविक सैन्य उद्देश्यों और सशस्त्र बलों की रणनीतिक, संचालन संबंधी और सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाता है।
सरकार ने अंतरिक मुद्दों पर विदेशी टिप्पणियों को लेकर जताई आपत्ति
केंद्र ने शुक्रवार को संसद को बताया कि हाल के दिनों में, ‘‘कुछ विदेशी नेताओं’’ ने भारत के कुछ ‘‘आंतरिक मुद्दों’’ पर टिप्पणी की और इन बयानों को लेकर उन देशों की सरकारों के समक्ष ‘‘कड़ी’’ आपत्ति दर्ज कराई गई। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि भारत सरकार ने ‘‘गलत बयानों’’ का खंडन करने के लिए आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण भी जारी किए हैं।
विदेश मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या सरकार ने भारत की आंतरिक स्थिति, विशेष रूप से सामाजिक सद्भाव पर हालिया अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों और विदेशी नेताओं की टिप्पणियों का संज्ञान लिया है। सिंह ने कहा, ‘‘सरकार ने भारत के विभिन्न पहलुओं, जिनमें देश की आंतरिक स्थिति भी शामिल है, से संबंधित अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों का संज्ञान लिया है। सरकार इन रिपोर्टों पर कड़ी नजर रखती है और भारत के बारे में किए गए किसी भी निराधार दावे या कथन का आवश्यकतानुसार खंडन करती है।’’
उन्होंने कहा कि हाल में, ‘‘कुछ विदेशी नेताओं’’ ने भारत के कुछ आंतरिक मुद्दों पर टिप्पणी की थी। विदेश राज्य मंत्री ने कहा, ‘‘इन बयानों को संबंधित सरकारों के समक्ष पुरजोर तरीके से उठाया गया है। इसके अलावा, सरकार ने गलत बयानों का खंडन करने के लिए आवश्यकतानुसार स्पष्टीकरण भी जारी किए हैं।’’
