जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ नहीं चलेगा अवमानना केस, कार्रवाई शुरू करने से CJI गवई ने किया इनकार

पीठ ने कहा, अवमानना ​​नोटिस जारी करने से मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने वाले वकील को अनुचित महत्व मिलेगा और घटना की अवधि बढ़ जाएगी। साथ ही, पीठ ने कहा कि इस घटना को अपनी स्वाभाविक मृत्यु के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए।

Supreme Court Shoe Hurling Case: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए इच्छुक नहीं है। अदालत ने कहा कि भारत के प्रधान न्यायाधीश (CJI) ने खुद उसके खिलाफ कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि अदालत में नारे लगाना और जूते फेंकना स्पष्ट रूप से अदालत की अवमानना का मामला है, लेकिन कानून के तहत यह पूरी तरह से संबंधित न्यायाधीश पर निर्भर करता है कि वह आगे बढ़े या नहीं।

CJI Row

जूता फेंकने वाले वकील के खिलाफ अवमानना कार्रवाई नहीं करेगा सुप्रीम कोर्ट (PTI/Screen Grab)

...तो वकील को अनुचित महत्व मिलेगा

पीठ ने कहा, अवमानना नोटिस जारी करने से मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकने वाले वकील को अनुचित महत्व मिलेगा और घटना की अवधि बढ़ जाएगी। साथ ही, पीठ ने कहा कि इस घटना को अपनी स्वाभाविक मृत्यु के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए। पीठ सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें 71 वर्षीय अधिवक्ता राकेश किशोर के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की मांग की गई थी, जिन्होंने 6 अक्टूबर को अदालती कार्यवाही के दौरान मुख्य न्यायाधीश की ओर जूता फेंका था।

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