11 अक्टूबर को गृहमंत्री अमित शाह लोकनायक जय प्रकाश नारायण की जन्मजयंती के मौके पर उनके गांव सिताबदियारा पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि किस तरह से लोकनायक के नाम से मशहूर जेपी ने इंदिरा गांधी सरकार के खिलाफ अलख जगाई जिससे डरकर इंदिरा गांधी को आपातकाल लगाना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि आखिर वो समाजवादी लोग कहां हैं जो लोग अपने आपको जेपी का शिष्य कहा करते थे। लेकिन सत्ता के खातिर उन लोगों के साथ समझौता कर बैठे जो फूटी आंख सुहाते नहीं थे। अब उनके इस बयान के बाद बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि वो मुलायम सिंह यादव को श्रद्धांजलि देने के लिए इटावा के सैफई में थे।
नीतीश कुमार, बिहार के सीएम
वो बताएंगे जेपी से कैसे थे संबंध
नीतीश कुमार ने कहा कि सबको पता नहीं है कि उनका जेपी से किस तरह का संबंध था। जेपी आंदोलन को दौरान हमने उनके नेतृत्व में काम किया था। हमारा उनके साथ खास लगाव था। वो हमें बताएंगे कि जेपी के बारे में। क्या वे कुछ भी उनके बारे में जानते हैं। आखिर उन्होंने जेपी के लिए क्या किया है। सिर्फ बात करने से कुछ नहीं होता है। बीजेपी के लोगों का यह स्वभाव है कि वो अपने विरोधियों पर हमला करते वक्त निचले स्तर तक उतर जाते हैं। क्या भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल बीजेपी शासन के दौरान नहीं हो रहा है।
#WATCH | Doesn't everyone know about our relation with JP? Work was done under his leadership, JP Movement. We had… t.co/3fKeujsR0R
— ANI (@ANI) Oct 12, 2022
सिताब दियारा में गृहमंत्री अमित शाह ने बताया था कि किस तरह भारतीय राजनीति में कांग्रेस के समय में करप्शन का दौर शुरू हुआ। उन्होंने गुजरात के सीएम चिमन भाई पटेल का जिक्र करते हुए कहा कि किस तरह इंदिरा गांधी उनके जरिए पैसों का इंतजाम करती थी। यह यब देख जब जेपी गुजरात पहुंचे तो उसका असर यह हुआ कि चिमन भाई की कुर्सी चली गई। लेकिन इंदिरा गांधी को लगने लगा कि जेपी के जरिए उनकी सत्ता को चुनौती दी जा रही है और उसका असर क्या हुआ हर किसी को पता है। लेकिन इससे भी बड़ा सवाल यह है कि उनके समर्थक या अनुयायी जो उनके आदर्शों पर चलने की बातें किया करते थे उन्होंने सत्ता हासिल करने के लिए या सत्ता में बने रहने के लिए क्या किया यह सब आपके सामने है। बिहार उसका जीता जागता उदाहरण है।
