Pune Bus Stand Rape News: विपक्ष की ओर से बढ़ते दबाव के बीच, जिसने इस घटना की तुलना 2012 के दिल्ली निर्भया सामूहिक बलात्कार से की है, मामले को सुलझाने के लिए पुरज़ोर कोशिशें चल रही हैं। पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर आरोपी दत्तात्रेय रामदास गाडे को पकड़ने के लिए कई टीमें बनाई हैं, जो मंगलवार की सुबह महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम (MSRTC) की बस में हुई घटना के बाद से फरार है।
भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़
समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुणे के पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार के हवाले से बताया कि उसके ठिकाने के बारे में जानकारी देने वाले को ₹1 लाख का इनाम दिया जाएगा।
2012 के निर्भया कांड को याद किया
पुणे बस दुष्कर्म मामले पर हंगामे के बीच भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने बृहस्पतिवार को 2012 के निर्भया कांड को याद किया और कहा कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को केवल कानून बनाने से नहीं बल्कि उनके उचित कार्यान्वयन से रोका जा सकता है।चंद्रचूड़ एक कार्यक्रम से इतर संवाददाताओं से बातचीत में पुणे के स्वारगेट इलाके में महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम की बस में एक महिला के साथ हुए बलात्कार की घटना के बारे में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे।
हिस्ट्रीशीटर दत्तात्रेय रामदास गाडे ने कथित तौर पर महिला संग दुष्कर्म किया
मंगलवार की सुबह राज्य परिवहन की बस के अंदर 26 वर्षीय महिला के साथ 37 साल के हिस्ट्रीशीटर दत्तात्रेय रामदास गाडे ने कथित तौर पर दुष्कर्म किया। गाडे को पकड़ने के लिए पुलिस ने 13 टीमें बनाई हैं।पूर्व प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यौन उत्पीड़न की घटनाओं को रोकने के लिए महिलाओं के लिए बनाए गए कानूनों का उचित क्रियान्वयन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में निर्भया कांड के बाद कानूनों में काफी बदलाव किए गए।
...जिसे बाद में 'निर्भया' कहा जाने लगा
दिल्ली में 2012 में फिजियोथैरेपी की 23 वर्षीय छात्रा, जिसे बाद में 'निर्भया' कहा जाने लगा, के साथ दिल्ली में एक बस में सामूहिक बलात्कार किया गया। बाद में उसने अपने घावों के कारण उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था। यह मामला राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा था।चंद्रचूड़ ने कहा, 'हम केवल कानून बनाकर ऐसी घटनाओं को नहीं रोक सकते। कानून के अलावा, समाज के कंधों पर भी बहुत बड़ी जिम्मेदारी है और महिलाओं के लिए बने कानूनों का उचित क्रियान्वयन भी जरूरी है। बड़ी संख्या में महिलाएं काम आदि के लिए जाती हैं। इसलिए उनके लिए बनाए गए कानूनों का उचित क्रियान्वयन किया जाना चाहिए, ताकि वे सुरक्षित महसूस करें।'
