Night Sky Sanctuary: भारत में पहला नाइट स्काई सैंक्चुअरी (Night Sky Sanctuary) लद्दाख में स्थापित किया जा रहा है। पीएम मोदी जल्दी ही इसका उद्घाटन करने वाले हैं। यह केंद्र शासित प्रदेश में एस्ट्रो टूरिज्म को बढ़ावा देगा और इससे रोजगार और आय हासिल होगी। दरअसल, दिनोंदिन अंधाधुंग विकास से होने वाला प्रकाश प्रदूषण रात के आकाश में तारों को देखने की हमारी क्षमता को कम कर रहा है। यहां तक कि अब प्रदूषण आसमान के पूरे दृश्य को बाधित करता है। रात के वक्त आकाश हमेशा तारा समूहों, पूरे नक्षत्रों और उल्का पिंडों का एक शानदार नजारा अब पहले जैसा नहीं दिखता है।
भारत में पहली नाइट स्काई सैंक्चुअरी खुलेगी
जो लोग रात के समय इस डार्क स्काई पार्क्स ( Dark Sky Parks) में जाएंगे, उन्हें आकाशीय अजूबे देखने को मिलेंगे जिसका उन्होंने कभी सपना देखा था। किसी बड़े शहर या छोटे से शहर में आसमान में कुछ सौ से अधिक सितारों को देखना असंभव नहीं तो मुश्किल ही है। आप सोच सकते हैं कि कुछ सौ तारे आपके लिए बहुत हैं जब तक कि आप मिल्की वे के छल्ले नहीं देख लेते। हम डार्क स्काई पार्क्स के बारे में कई दिलचस्प बातें बता रहे हैं जैसे कि हर किसी को यहां क्यों जाना चाहिए।
क्या है नाइट स्काई सैंक्चुअरी?
नाइट स्काई सैंक्चुअरी एक सुरक्षित क्षेत्र है जहां रात में आसमान साफ रहता है, जहां आप तारों को देख सकते हैं और महसूस कर सकते हैं जैसे कि आपने दूसरे ब्रह्मांड में कदम रखा हो। इंटरनेशनल डार्क स्काई एसोसिएशन (IDA) के अनुसार, डार्क स्काई रिजर्व एक सार्वजनिक या निजी भूमि है जिसमें तारों वाली रातों के दौरान वैज्ञानिक, प्राकृतिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक, जानकारी और विरासत नजर आती है।
किसी जगह के नाइट स्काई सैंक्चुअरी के रूप में नामित होने के साथ ही इसे गंभीर मानदंडों को पूरा करना पड़ता है। इसमें एक निश्चित स्तर का वायु और प्रकाश प्रदूषण मुक्त अंधेरा, प्राकृतिक अंधेरे की मौजूदगी और स्थानीय आबादी का समर्थन शामिल है। इसी तरह डार्क स्काई एसोसिएशन खगोल विज्ञान पर्यटन को प्रोत्साहित करने के लिए नाइट स्काई सैंक्चुअरी के रूप में कुछ जरूरतों को पूरा करने वाले पार्कों को मान्यता देता है। डार्क स्काई पार्क सार्वजनिक क्षेत्र हैं जो आम तौर पर निर्जन होते हैं और किसी भी आकार के हो सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा है कि नाइट स्काई रिजर्व से खगोल-पर्यटन की पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों को बढ़ावा देने, खगोल विज्ञान के बारे में जागरूकता फैलाने, कम कृत्रिम प्रकाश के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने और वन्य जीवन के संरक्षण की उम्मीद है।
