Malegaon Blast Case Verdict: मालेगांव बम धमाके में 17 साल बाद आया फैसला, NIA कोर्ट ने प्रज्ञा ठाकुर, कर्नल पुरोहित सहित सभी 7 आरोपियों को किया बरी

एनआईए कोर्ट ने आज 2008 मालेगांव बम विस्फोट मामले साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित सभी 7 आरोपियों को बरी कर दिया। विशेष NIA कोर्ट के जज ए.के. लाहोटी फैसला सुनाया। मालेगांव बम धमाका देश के सबसे विवादित और चर्चित आतंकी मामलों में से एक रहा है।

Malegaon Blast Case Verdict: एनआईए कोर्ट ने 2008 मालेगांव बम विस्फोट मामले में आज अपना फैसला सुनाया। अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। एनआईए अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने यह तो साबित कर दिया कि मालेगांव में विस्फोट हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं कर पाया कि उस मोटरसाइकिल में बम रखा गया था। अदालत इस नतीजे पर पहुंची है कि घायलों की संख्य 101 नहीं, बल्कि 95 साल थी और कुछ मेडिकल सर्टिफिकेट में हेराफेरी की गई थी।

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मालेगांव धमाके में आया अदालत का फैसला (PTI)

अदालत ने क्या-क्या कहा?

अदालत ने कहा, इस मामले में यूएपीए लागू नहीं किया जाएगा क्योंकि नियमों के अनुसार मंज़ूरी नहीं ली गई थी। मामले में यूएपीए के दोनों मंज़ूरी आदेश दोषपूर्ण हैं। श्रीकांत प्रसाद पुरोहित के आवास में विस्फोटकों के भंडारण या संयोजन का कोई सबूत नहीं मिला है। पंचनामा करते समय जांच अधिकारी ने घटनास्थल का कोई स्केच नहीं बनाया था। घटनास्थल से कोई फिंगरप्रिंट, डंप डेटा या कुछ और एकत्र नहीं किया गया था। नमूने दूषित थे, इसलिए रिपोर्ट निर्णायक नहीं हो सकती और विश्वसनीय नहीं हैं। विस्फोट में कथित रूप से शामिल बाइक का चेसिस नंबर स्पष्ट नहीं था। अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर सका कि विस्फोट से ठीक पहले वह साध्वी प्रज्ञा के पास थी।

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