बुलेट ट्रेन परियोजना में पहली बार इस्तेमाल होगी 'वेंटिलेटेड हुड' तकनीक, जानिए क्या होगा इसका काम

लगभग 500 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसमें महाराष्ट्र में सात और गुजरात में एक, कुल आठ पर्वतीय सुरंगें शामिल हैं।

Bullet Train Update: मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का निर्माण कर रही नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) ट्रेनों के परिचालन के दौरान पैदा होने वाली तेज ध्वनि को नियंत्रित करने के लिए आठ पर्वतीय सुरंगों के दोनों सिरों पर कुल 16 वेंटिलेटेड हुड (हवादार संरचनाएं) बना रही है। अधिकारियों ने बताया कि यह तकनीक भारत में पहली बार इस्तेमाल की जा रही है, क्योंकि मौजूदा रेलवे सुरंगों में 'वेंटिलेटेड हुड' की जरूरत नहीं पड़ती। इसकी वजह यह है कि पारंपरिक ट्रेनें अपेक्षाकृत काफी कम गति से चलती हैं। बुलेट ट्रेन की अधिकतम गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा होगी।

Bullet train

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर नया अपडेट (PIB)

500 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर

लगभग 500 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर दुर्गम भौगोलिक क्षेत्र से होकर गुजरता है और इसमें महाराष्ट्र में सात और गुजरात में एक, कुल आठ पर्वतीय सुरंगें शामिल हैं। परियोजना से जुड़े एक विशेषज्ञ ने बताया कि जब कोई तेज रफ्तार ट्रेन किसी सुरंग में प्रवेश करती है, तो वह अपने आगे बड़ी मात्रा में हवा को धकेलती है। यह ठीक उसी तरह होता है जैसे किसी सिलेंडर के भीतर पिस्टन आगे बढ़ता है।

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