सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष न्यायालय के एक जज को 'आतंकवादी' बताने के मामले में कड़ी नाराजगी जाहिर की है। शुक्रवार (25 नवंबर, 2022) को कोर्ट ने रजिस्ट्री को वादी को कारण बताओ नोटिस जारी करने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसके साथ ही टिप्पणी की और कहा कि आपको कुछ माह जेल भेजना होगा, तभी आपको अहसास होगा।
तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (क्रिएटिवः अभिषेक गुप्ता)
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हिमा कोहली की बेंच ने वादी की ओर से लगाए गए आरोपों को ‘अपमानपूर्ण’ करार दिया। साथ ही कहा, ‘‘आपको कुछ महीने के लिए जेल भेजना होगा, तब आपको एहसास होगा।’’ बेंच ने शख्स की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘आप सुप्रीम कोर्ट के एक जज पर यूं ही कोई आरोप नहीं लगा सकते।’’शीर्ष न्यायालय सेवा के एक पेंडिंग विषय में व्यक्ति की अर्जी पर सुनवाई कर रहा था।
अर्जी देने वाले व्यक्ति की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि वह उसका प्रतिनिधित्व तभी करेंगे, जब वह माफी मांगेगा। शख्स ने कहा, ‘‘मैं माफी मांगता हूं।’’ उसने कहा कि वह उस वक्त अत्यधिक मानसिक पीड़ा से गुजर रहा था, जब उसने अर्जी दायर की थी। बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा, ‘‘यह अपमानपूर्ण है।’’
कोर्ट ने कहा, ‘‘हम आपको इस बारे में कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे कि आप पर क्यों नहीं आपराधिक अवमानना का मुकदमा चलना चाहिए।’’ बेंच यह भी बोली, ‘‘हम अर्जी की समय पूर्व सुनवाई के इच्छुक नहीं है। अर्जी खारिज समझी जाए।’’ बेंच ने अपने आदेश में कहा कि वह व्यक्ति को अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने के सिलसिले में एक हलफनामा दाखिल करने के वास्ते तीन हफ्ते का वक्त देती है। (पीटीआई इनपुट्स के साथ)
