Nepal Flash Flood: नेपाल की त्रिशूली नदी में आई अचानक भयानक बाढ़ से मची तबाही का अंदाजा लगा पाना लभगभग नामुमिक है। इस आपदा की वजह से अब तक 1290 लोगों की मौत हो गई है। वहीं, हजारों लोग लापता हैं। ग्लेशियर फटने के बाद आए सैलाब ने कई घरों, दुकानों, पुलों और ऐतिहासिक मंदिरों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। टाइम्स नाउ नवभारत संवाददाता साकेत कुमार ने आपदास्थल पर जाकर हालात का जायजा लिया।
Nepal Flood: ग्लेशियर फटने से आई बाढ़ ने मचाई भारी तबाही, लगातार बारिश के बीच रेस्क्यू ऑपरेशन बना चुनौती।
लोगों के सामने जीवन जीने का संकट
रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में स्थानीय व्यापारियों, विशेषकर आभूषण व्यवसायियों, की पूरी पूंजी और दुकान बह गई है, जिससे वे कर्ज के बोझ तले दब गए हैं। लगभग 1,000 परिवार सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं, कई लोग लापता हैं और मृतकों की संख्या भी काफी अधिक है। लगातार हो रही बारिश बचाव कार्यों के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, जिसके बावजूद स्वयंसेवक और स्थानीय लोग अपने घरों से सामान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
पीड़ितों ने सुनाई आपबीती
सेना, पुलिस और विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य दिन-रात राहत कार्यों में जुटे हुए हैं। कई घरों के दरवाजे मलबे के कारण जाम हो गए हैं, स्वयंसेवक और स्थानीय लोग खिड़कियों के जरिए या शटर तोड़कर घरों के अंदर से जरूरी सामान और दस्तावेज निकालने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों के पास जीवन भर की पूंजी खोने के बाद अब केवल ऋण या लोन का बोझ बचा है, और वे किसी तरह अपनी बची-खुची संपत्ति को सहेजने में लगे हैं।
देवी घाट में हुई तबाही के बाद स्थिति इतनी विकट है कि रेस्क्यू टीम के लिए हर जगह पहुंचना एक बहुत बड़ी चुनौती है। हालांकि सेना, पुलिस और स्वयंसेवी संस्थाएं लगातार राहत कार्यों में जुटी हैं, लेकिन घरों के दरवाजे मलबे में फंसने और अलाइनमेंट खराब होने के कारण वे आसानी से नहीं खुल पा रहे हैं। इस कारण प्रभावित लोग खुद ही खिड़कियों के जरिए अंदर घुसकर या शटर तोड़कर अपना जरूरी सामान निकालने को मजबूर हैं। निरंतर हो रही बारिश इस राहत कार्य में एक और बड़ी बाधा बनी हुई है, जिससे काम और अधिक कठिन हो गया है।
बारिश बन रही राहत बचाव कार्य में बाधा
देवी घाट इलाके में लगातार हो रही बारिश राहत और बचाव कार्यों के लिए एक प्रमुख बाधा है। यह बारिश स्थिति को काफी खतरनाक और अनिश्चित बना रही है, जिससे बचाव दल और स्थानीय निवासियों के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। इसके अलावा, बारिश और बाढ़ की आशंका ने स्थानीय लोगों में डर का माहौल पैदा कर दिया है, क्योंकि नदी का जलस्तर और धार अभी भी स्थिर नहीं हुई है।
स्थानीय लोग निरंतर बारिश और बाढ़ के खतरे के कारण खौफ के माहौल में हैं और स्थिति अभी भी खतरनाक बनी हुई है। वहां बचाव दल और स्वयंसेवक सक्रिय हैं, जो मलबे में दबे हुए घरों और दुकानों से सामान निकालने में लोगों की सहायता कर रहे हैं। वीडियो से यह संकेत मिलता है कि लोग स्वयं ही सावधानी बरतते हुए ऊंचे इलाकों में शरण ले रहे हैं।
