राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) 2026 में प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके अनुवाद का काम एक ही समूह के लोगों से कराए जाने की वजह से संभवत: परीक्षा की गोपनीयता से समझौता हुआ। सूत्रों ने यह बात कही है। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने इस बारे में जानकारी अनौपचारिक रूप से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को दे दी है और संभव है कि अपनी औपचारिक सिफारिशों में भी इसका उल्लेख करे। अधिकारियों के अनुसार, नीट-यूजी 2026 में हुईं गड़बड़ियां 2024 की अनियमितताओं से पूरी तरह अलग थीं। वर्ष 2024 में एक परीक्षा केंद्र प्रभारी ने कथित तौर पर प्रश्नपत्र लीक करने वाले गिरोह के साथ मिलकर प्रश्नपत्र की चोरी और उसे बांटने में मदद की थी।
नीट पेपर लीक मामला (AI Image)
उन्होंने बताया कि 2024 की जांच के बाद सीबीआई ने प्रश्नपत्र को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने, उसकी सुरक्षा और परीक्षा कराने की व्यवस्था में कई बदलाव करने के सुझाव एनटीए को दिए थे, ताकि प्रश्नपत्र की गोपनीयता बनी रहे।
सूत्रों के अनुसार, एनटीए ने इन सुझावों को 2025 और 2026 की नीट परीक्षा में लागू किया, इसलिए तकनीकी रूप से इस बार कोई "प्रश्नपत्र लीक" नहीं हुआ। सूत्रों ने बताया कि 2026 की परीक्षा में एनटीए के पैनल में शामिल जिन शिक्षकों को प्रश्नपत्र तैयार करने और मराठी में अनुवाद करने का काम दिया गया था, उनमें रसायन विज्ञान के शिक्षक पी. वी. कुलकर्णी, भौतिकी की शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे और जीव विज्ञान की शिक्षिका मनीषा संजय हवलदार शामिल थीं।आरोप है कि इन लोगों ने अंतिम प्रश्नपत्र के सवाल याद कर लिए और पुणे में अपनी विशेष ट्यूशन कक्षाओं के कुछ चुनिंदा छात्रों को बता दिए।
सूत्रों के अनुसार, ये शिक्षक प्रश्नपत्र तैयार करने और उसका अनुवाद करने, दोनों कामों में शामिल थे, तीन मई को हुई परीक्षा से पहले उन्हें अंतिम प्रश्नपत्र लंबे समय तक देखने का मौका मिला।
सूत्रों के अनुसार "सीबीआई जांच में पता चला कि इस दौरान उन्हें सुरक्षा व्यवस्था वाले माहौल में रखा गया था। यह प्रक्रिया कई दिनों तक चली। वे हर दिन अपना काम खत्म करने के बाद घर जाते थे, ट्यूशन पढ़ाते थे और अगले दिन फिर ड्यूटी पर लौट आते थे।"
एक प्रश्न बैंक तैयार किया
सूत्रों के अनुसार, "उन्होंने अंतिम प्रश्नपत्र के सवाल याद कर लिए। घर जाकर उन्होंने उन सवालों का एक प्रश्न बैंक तैयार किया और अपने ट्यूशन सेंटर के कुछ चुनिंदा छात्रों को यह कहते हुए दे दिया कि ये "बहुत महत्वपूर्ण" सवाल हैं। उन्होंने छात्रों को यह नहीं बताया कि ये आने वाली नीट परीक्षा के असली सवाल हैं।सीबीआई के अनुसार, इन शिक्षकों की परिचित स्थानीय ’ब्यूटीशियन’ मनीषा वाघमारे ने इन कक्षाओं में पढ़ने वाले कुछ छात्रों से यह प्रश्न बैंक हासिल करके इसे प्रश्नपत्र के रूप में टाइप किया और धनंजय निवृत्ति लोखंडे नामक व्यक्ति को बेच दिया।
एजेंसी के अनुसार लोखंडे ने इसे दूसरे बिचौलियों तक पहुंचाया। इसके बाद कथित सवाल कई राज्यों में बांटे गए। सूत्रों के अनुसार, अगर वाघमारे इस मामले में शामिल नहीं होती, तो यह प्रश्नपत्र इतने अधिक अभ्यर्थियों तक नहीं पहुंचता और यह गड़बड़ी कभी सामने नहीं आती।सूत्रों ने बताया कि लोखंडे के जरिए यह प्रश्नपत्र कई लोगों तक पहुंचाया गया, जिसके बाद आरोपियों को लाखों रुपये मिले। सूत्रों के अनुसार ऐसा ही एक प्रश्नपत्र एक अभ्यर्थी के पास पहुंचा, जिसने इसकी जानकारी एनटीए को दी। इसके बाद एनटीए ने 12 मई को नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द कर दी।
शिक्षा मंत्रालय ने जांच सीबीआई को सौंप दी। सूत्रों के अनुसार, सीबीआई ने जांच का जिम्मा संभालने के बाद कुछ ही दिन में मामले का खुलासा कर दिया और तीनों शिक्षकों, वाघमारे, कोचिंग सेंटर से जुड़े लोगों और बिचौलियों समेत 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। करीब दो महीने में सीबीआई ने पूरी साजिश का खुलासा किया और यहां की एक विशेष अदालत में 13 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, जिनमें कुलकर्णी, हवलदार, मंधारे, वाघमारे और लोखंडे शामिल हैं।
सीबीआई ने मंगलवार को एक बयान में कहा, "इस मामले में कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान और भौतिकी के तीन एनटीए विषय विशेषज्ञ शामिल हैं। लीक हुए सवालों को हासिल करने और उन्हें आगे पहुंचाने वाले कई बिचौलियों की पहचान करके उन्हें गिरफ्तार किया गया है।
सीबीआई ने कहा, "कोचिंग संस्थानों से जुड़े दो लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने उक्त विशेषज्ञों से लीक हुए प्रश्नपत्र हासिल किए थे। पैसों के लेन-देन की जांच की गई और आरोपियों के कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिया गया है।"
