न्यायपालिका चैप्टर विवाद: SC ने लगाया किताब पर बैन, NCERT के निदेशक-शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी, माफी अभी मंजूर नहीं

सीजेआई ने कहा कि 'हमारे संविधान के निर्माताओं ने इस बात का भरपूर ध्यान रखा और यह सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त सावधानी बरती कि संवैधानिक प्रावधानों को इस तरह से दर्शाया जाए कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे में कार्य करते हुए लोकतंत्र के तीनों स्तंभ अपनी भूमिका को बिना एक दूसरे से प्रभावित हुए निभाते रहें।

NCERT judiciary chapter row: 'न्यायिक भ्रष्टाचार' से संबंधित राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की किताब पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले की सुनवाई करते हुए प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हम इस मामले की गंभीरता से जांच चाहते हैं। न्यायपलिका का मुखिया होने के नाते उनका कर्तव्य है कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सामने लाया जाए। CJI ने कहा कि वह तब तक शांत नहीं बैठेंगे जब तक वह खुद संतुष्ट नहीं हो जाते। सीजेआई ने कहा कि उनकी संतुष्टि तक सुनवाई जारी रहेगी और बिना शर्म माफी अभी मंजूर नहीं है। कोर्ट ने NCERT के निदेशक एवं शिक्षा सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

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एनसीआरटी पुस्तक विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई।

'जिम्मेदारों के खिलाफ क्यों न शुरू हो अवमानना की कार्रवाई'

चीफ जस्टिस ने कहा कि NCERT ने एक प्रेस रिलीज के माध्यम से माफी भी मांगी है। हालांकि यह सवाल ये है कि क्या यह माफी पूरे मन से मांगी गई या फिर दिखावे के लिए। या फिर तब दी गई है जब गंभीर और न्यायपालिका की कभी न भरा जा सकने वाला नुकसान हो चुका है। सुप्रीम कोर्ट ये भी देखेगा। कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव एवं डॉ. दिनेश प्रसाद को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में पूछा गया है कि उनके विरुद्ध या विवादित अध्यायों के लिए जिम्मेदार अन्य व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना अधिनियम या किसी अन्य लागू कानून के तहत उपयुक्त कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए?

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