जेल में बच्चे को जन्म देने का सदमा बर्दाश्त करने लायक नहीं: निदा को जमानत देते हुए अदालत की टिप्पणी

Nasik Case TCS: न्यायाधीश ने कहा कि आवेदक के गर्भवती होने के साथ-साथ मामले की जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र भी दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में उसे न्यायिक हिरासत में बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।

Nida Khan Nasik Case: नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) से जुड़े एक मामले में गर्भवती निदा खान को जमानत देते हुए स्थानीय अदालत ने कहा कि जेल में बच्चे को जन्म देने की पीड़ा किसी भी महिला के लिए असहनीय है। अदालत ने इस संदर्भ में भगवान कृष्ण के जन्म का भी उल्लेख किया।

जेल में बच्चे को जन्म देने का सदमा बर्दाश्त करने लायक नहीं: निदा को जमानत देते हुए अदालत की टिप्पणी

जेल में बच्चे को जन्म देने का सदमा बर्दाश्त करने लायक नहीं: निदा को जमानत देते हुए अदालत की टिप्पणी

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (नासिक रोड) के. जी. जोशी ने अपने आदेश में कहा कि अब तक की जांच से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि खान ने सह-आरोपियों की मदद से कथित तौर पर 'पीड़िता को वैचारिक रूप से प्रभावित करने' का प्रयास किया और उसकी 'सोच तथा धर्म बदलने की कोशिश की'। अदालत ने यौन उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण से जुड़े मामले की जांच का उल्लेख करते हुए कहा कि आरोपियों ने पीड़िता को यह विश्वास दिलाने का भी प्रयास किया कि 'हिंदू धर्म में आपत्तिजनक कहानियां हैं।'

End of Feed