Civil Services Day : सिविल सर्विसेज डे के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को देश के नौकरशाहों को 'नागरिक देवो भव' का मंत्र दिया। पीएम ने कहा कि बीते एक दशक में देश भारी बदलाव के दौर से गुजरा है, ऐसे में नौकरशाहों को अपने कामकाज और सेवा के तरीके में बदलाव लाना चाहिए। पीएम ने कहा कि 'हमें एक चीज हमेशा याद रखनी चाहिए कि दुनिया चाहे जितनी भी तकनीक वाली हो जाए लेकिन हमें इंसानों की बुद्धिमत्ता को कभी कम नहीं आंकना चाहिए। अधिकारियों को गरीबों की आवाज को सुनना एवं उनके दर्द को महसूस करना चाहिए। उनकी समस्याएं दूर करना आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। जैसे 'अतिथि देवो भव' होता है वैसे ही 'नागरिक देवो भव' के मंत्र को लेकर चलना है।'
सिविल सर्विसेज डे पर नौकरशाहों को संबोधित करते पीएम मोदी।
हमारी नीतियां 1000 वर्ष के भविष्य को आकार देंगी-पीएम
पीएम ने कहा कि‘आज हम जिन नीतियों पर काम कर रहे हैं और जो निर्णय ले रहे हैं, वे आगामी 1,000 वर्ष के भविष्य को आकार देंगे।’ मोदी ने कहा कि भारत का आकांक्षी समाज - युवा, किसान और महिलाएं - और इसके सपने अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘इन असाधारण आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए असाधारण गति आवश्यक है।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि शासन की गुणवत्ता इस बात से निर्धारित होती है कि योजनाएं लोगों तक कितनी गहराई से पहुंचती हैं और उनका जमीनी स्तर पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ता है।
'प्रभावशाली बदलाव देख रहा देश'
पीएम मोदी ने कहा कि पिछले 10 साल में भारत धीमी गति के परिवर्तन से आगे बढ़कर अब प्रभावशाली बदलाव देख रहा है। उन्होंने कहा, ‘भारत शासन, पारदर्शिता और नवोन्मेष में नए मानक स्थापित कर रहा है।’मोदी ने कहा कि प्रौद्योगिकी के युग में शासन का मतलब प्रणाली का प्रबंधन करने से नहीं है, बल्कि इसका तात्पर्य संभावनाओं को बढ़ाना है। उन्होंने 2023 में भारत द्वारा आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि जनभागीदारी के दृष्टिकोण ने इस आयोजन को लोगों के आंदोलन में बदल दिया और दुनिया ने इसे स्वीकार किया।
आज भारत नेतृत्व कर रहा-पीएम
उन्होंने कहा, ‘भारत सिर्फ भाग नहीं ले रहा, बल्कि नेतृत्व कर रहा है।’ मोदी ने सिविल सेवकों से गरीबों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील होने, उनकी आवाज सुनने, उनकी संवेदनशीलता का सम्मान करने और उनकी समस्याओं के समाधान को प्राथमिकता देने को कहा।
