म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग इस समय पांच दिवसीय भारत दौरे पर हैं। यहां उन्होंने पीएम मोदी और अपनी भारतीय समकक्ष राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में उनका स्वागत किया। इस दौरान दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर जोर दिया गया।
PM मोदी और राष्ट्रपति मुर्मू से मिले म्यामांर के राष्ट्रपति ह्लाइंग( फोटो- PTI)
राष्ट्रपति भवन ने दी जानकारी
राष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल से इस मुलाकात की जानकारी साझा की गई। मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि भारत और म्यांमार के बीच साझा बौद्ध विरासत और सदियों पुराने पीपल-टू-पीपल कनेक्ट दोनों देशों की मित्रता को विशेष गर्मजोशी प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा, म्यांमार भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसे भारत का दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए प्रवेश द्वार माना जाता है। राष्ट्रपति ने दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों का उल्लेख किया।
पीएम मोदी से हैदराबाद हाउस में की मुलाकात
इससे पहले राष्ट्रपति ह्लाइंग ने हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत अपने पड़ोसी देशों के साथ सहयोग और साझेदारी को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में म्यांमार की विशेष भूमिका है। दोनों देशों के बीच व्यापार, संपर्क, क्षमता निर्माण, सुरक्षा सहयोग और विकास परियोजनाओं के क्षेत्र में लगातार प्रगति हो रही है।
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने म्यांमार में शांति और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में भारत हर तरह की मदद को तैयार है। उन्होंने संघीय शासन व्यवस्था और आर्थिक विकास के अनुभव साझा करने की भी बात कही।
विदेश सचिव ने दी ये जानकारी
पीएम मोदी और म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की मुलाकात के बारे में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने एक खास प्रेस ब्रीफिंग में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह बातचीत म्यांमार में लंबे समय से चल रही शांति प्रक्रिया के संदर्भ में हुई,जिसमें अलग-अलग जातीय समूहों को एक साथ लाकर समाधान निकालने की कोशिश हो रही है, लेकिन अभी सभी पक्षों के बीच पूरी सहमति नहीं बनी है।
विदेश सचिव ने कहा कि प्रधानमंत्री का संदेश यह था कि जब म्यांमार लोकतंत्र की ओर लौटे, तो वहां स्थायी शांति होनी चाहिए, सभी को शामिल किया जाना चाहिए और सभी पक्षों को बातचीत में जगह मिलनी चाहिए। भारत ने हमेशा म्यांमार के लोकतंत्र, शांति प्रक्रिया और सभी पक्षों को शामिल करने की बात उठाई है।
आंग सान सू की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठा
इस दौरान दोनों के बीच नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की गिरफ्तारी का मुद्दा भी उठा। बता दें कि म्यांमार की पूर्व स्टेट काउंसलर और नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू का मामला 2021 के तख्तापलट से जुड़ा है। 2021 में म्यांमार की सेना ने लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिराकर सू पर भ्रष्टाचार, कोविड नियमों का उल्लंघन और सेना के खिलाफ असंतोष को भड़काने समेत कई मामलों में आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। बाद में सू को 33 साल की सजा सुनाई गई, जिसे बाद में घर में नजर बंद करने के फैसले में बदल दिया गया। संयुक्त राष्ट्र समेत कई मानवाधिकार संस्थाओं ने उनके खिलाफ चले मुकदमों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की।
म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग की यह भारत यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई गति देने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इस दौरे से द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूती मिलेगी तथा क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
