MP Election 2023: महाभारत में एक प्रसंग है, जब गुरु द्रोण हस्तिनापुर के अपने शिष्यों से गुरु दक्षिणा में राजा द्रुपद की हार मांग लेते हैं, पहले कौरव राजकुमार जाते हैं, बंधक बना लिए जाते हैं, फिर पांडव जााते हैं और युद्ध में द्रुपद को हरा देते हैं। इसी युद्ध के दौरान द्रुपद का एक फेमस डायलॉग है- ये राजा द्रुपद का चक्रव्यूह है, इसे तोड़ना किसी के बस की बात नहीं...। कुछ ही ऐसी ही कहानी मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा (Chhindwara) की लगती है, जहां कांग्रेस के कमलनाथ (Kamalnath) मॉडल के सामने विरोधियों की हर रणनीति फेल होती दिखी है। यहां 1997 के उपचुनाव को छोड़कर कांग्रेस कभी नहीं हारी है।
छिंदवाड़ा में अपराजेय रहे हैं कांग्रेस के कमलनाथ
अपराजेय कमलनाथ एण्ड फैमिली
मध्यप्रदेश में स्थित छिंदवाड़ा पूरे देश के लिए एक सही मायने में मॉडल की तरह ही है। यह सीट कांग्रेस से ज्यादा कमलनाथ और उनके परिवार के लिए जानी जाती है। यहां से खुद कमलनाथ, उनकी पत्नी अलका नाथ और बेटे नकुल कमलनाथ जीत कर सांसद बन चुके हैं। मोदी लहर में कांग्रेस के कई धुरंधरों की सीट पर बीजेपी ने विजय का पताका फहराया था, यहां तक कि राहुल गांधी भी अमेठी से चुनाव हार गए थे, लेकिन पिछली बार भी कमलनाथ का चक्रव्यूह तोड़ने में बीजेपी असफल ही रही थी।
क्या है छिंदवाड़ा मॉडल
छिंदवाड़ा एक आदिवासी इलाका है। कभी सबसे पिछड़े इलाके में शुमार होता था, लेकिन आज विकासित इलाकों में टॉप में शामिल है। सड़कों के जाल से लेकर यह इलाका एक एजुकेशन हब के रूप में विकसित कर चुका है। छिंदवाड़ा में आज की तारीख में तीन राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं। यहां स्कील डेवलपमेंट वाली शिक्षा का मॉडल विकसित किया गया है। आज की तारीख में छिंदवाड़ा में इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज, नवोदय विद्यालय, सेंट्रल स्कूल, पॉलिटेक्निक कॉलेज, फुटवेयर डिजाइन सेंटर, नॉलेज सिटी, NIIT जैसे संस्थान हैं, जहां युवाओं को बेहतर शिक्षा आसानी से मिल रही है।
कमलनाथ का कॉरपोरेट स्टाइल
कहा जाता है कि कमलनाथ छिंदवाड़ा को एक कॉरपोरेट तरीके से चलाते हैं। कमलनाथ खुद कई कंपनियों का मालिक हैं। इसलिए जब छिंदवाड़ा को इन्होंने राजनीति का केंद्र बनाया तो कई विकास कार्य किए। जिस भी विभाग के मंत्री कमलनाथ बने, उस विभाग से कोई न कोई सौगत छिंदवाड़ा को जरूर मिली। कमलनाथ ने सबसे ज्यादा फोकस युवाओं की नौकरी पर किया। शहर के युवा नौकरी के लिए नहीं भटकें, इसके लिए उन्होंने स्कील वाले प्रोग्राम पर फोकस किया। कई कंपनियों को छिंदवाड़ा में खुलवाया। जिससे युवाओं को कमाने के बाहर न जाना पड़े। यहां का कांग्रेस कार्यालय भी बहुत ही अलग तरीके से काम करता है। दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार यहां प्रशासनिक और राजनीति दोनों के लिए अलग-अलग सिस्टम है। यहां लोग किसी भी समस्या को लेकर आ सकते हैं, उन्हें कुछ न कुछ मदद जरूर मिलती है। भले ही मांग सामाजिक हो या व्यक्तिगत।
इस बार का हाल
मध्यप्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। अभी के समय में जिले की सभी सीटों पर कांग्रेस के विधायक हैं। कांग्रेस और बीजेपी में कांटे की टक्कर की बात कही जा रही है। दोनों पार्टियां काफी समय से चुनाव की तैयारियों में जुटी है। इस बार बीजेपी फिर से कमलनाथ के गढ़ को जीतने के लिए पूरी जोर लगा रही है। अमित शाह तक यहां रैली कर चुके हैं। कमलनाथ पर आरोप पर आरोप लगा जा रहा है। कमलनाथ भी जमकर पलटवार कर रहे हैं। अब कमलनाथ का चक्रव्यूह इस बार बीजेपी तोड़ पाएगी या फिर कांग्रेस की जीत होगी ये तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना तय है कि लड़ाई जोरदार होने वाली है।
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