MP CM Mohan Yadav Land Scam: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन में कथित रूप से करोड़ों रुपये के भूमि घोटाले के आरोप लगने के बाद राज्य से लेकर केंद्र तक की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस ने इसे 'महाकाल की जमीन की लूट' करार देते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे और न्यायिक जांच की मांग की है।
सीएम मोहन यादव पर जमीन घोटाले के आरोप से गरमाई सियासत
इसी बीच, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने इस पूरे विवाद में एक नया और चौंकाने वाला राजनीतिक एंगल जोड़ दिया है, जिससे भाजपा के भीतर गुटबाजी की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सीएम बदलने की अंदरूनी साजिश-अखिलेश यादव
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए लोकसभा सांसद अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री मोहन यादव का एक तरह से बचाव किया और सारा ठीकरा भाजपा के शीर्ष नेतृत्व पर फोड़ दिया। अखिलेश ने कहा, "मोहन यादव को बदनाम करने के लिए खुद भाजपा ने ही यह साजिश रची है। वे पहले भी रियल एस्टेट का काम करते थे, यह कोई नई बात नहीं है।
असल में भाजपा मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों को हटाने का रास्ता ढूंढ रही है, क्योंकि उनका असली मकसद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को कुर्सी से हटाना है। यह सब मुख्यमंत्रियों को बदलने की एक अंदरूनी राजनीतिक साजिश के तहत किया जा रहा है।"
क्या हैं आरोप?
दरअसल, मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पिछले दो वर्षों के दौरान सीएम मोहन यादव के परिवार और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में लगभग 168 एकड़ की 137 जमीनें खरीदी हैं, जिनकी कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है। आरोप है कि ये जमीनें उन्हीं इलाकों में खरीदी गईं जहां सरकार ने बड़ी सड़क परियोजनाओं और लैंड यूज (भूमि उपयोग) बदलने की घोषणाएं की थीं।
कांग्रेस ने बोली-सामने आई 'मोहन यादव फाइल्स'
कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री पर नैतिक आधार पर इस्तीफे का दबाव बनाते हुए पूछा कि जो व्यक्ति मंत्री बनने से पहले सीमित जमीन का मालिक था, वह अचानक 335 एकड़ का मालिक कैसे बन गया?
वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखा तंज कसते हुए कहा कि देश ने 'कश्मीर फाइल्स' देखी है, और अब मध्य प्रदेश में 'मोहन यादव फाइल्स' सामने आ चुकी है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को विधानसभा में पूरी ताकत से उठाने का एलान किया है।
