Narayana Murthy On AI Things: इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर सवाल उठाते हुए इसकी अधिकतर चीजों को मूर्खतापूर्ण बताया है। नारायण मूर्ति ने कहा है कि भारत में हर चीज के लिए एआई के बारे में बात करना फैशन बन गया है, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ज्यादातर तथाकथित एआई चीजें मूर्खतापूर्ण, अजीबोगरीब हैं। बुधवार को मुंबई में एक कार्यक्रम में बोलते हुए मूर्ति ने कहा, मुझे लगता है कि किसी तरह भारत में हर चीज के लिए एआई के बारे में बात करना एक फैशन बन गया है। मैंने कई सामान्य, साधारण कार्यक्रमों को एआई के रूप में प्रचारित होते देखा है।
नारायण मूर्ति ने बताए दो सिद्धांत
मूर्ति ने एआई के दो मूलभूत सिद्धांतों को साझा किया - मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग। मशीन लर्निंग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि यह बड़े पैमाने पर सहसंबंध के अलावा कुछ नहीं है। बड़ी मात्रा में डेटा के आधार पर यह आपको भविष्यवाणी करने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि डीप लर्निंग मानव मस्तिष्क की कार्यप्रणाली की नकल करता है। मशीन लर्निंग सुपरवाइज्ड एल्गोरिदम को संभालती है, जबकि डीप लर्निंग अनसुपरवाइज्ड एल्गोरिदम का ख्याल रखती है।
मूर्ति ने कहा, डीप लर्निंग अपने पास उपलब्ध डेटा का उपयोग करके कार्यक्रमों की नई शाखाएं या नई स्थितियां बनाती है और फिर यह निर्णय लेने में सक्षम हो जाती है। डीप लर्निंग और न्यूरल नेटवर्क का उपयोग करने वाले अनसुपरवाइज्ड एल्गोरिदम में ऐसी चीजें करने की बहुत अधिक क्षमता होती है जो मानव की बेहतर से बेहतर नकल करेंगी।
अधिकांश चीजें मूर्खतापूर्ण, पुराने कार्यक्रम
उन्होंने कहा, हालांकि, मुझे लगता है कि उपलब्ध तथाकथित एआई की अधिकांश चीजें मूर्खतापूर्ण, पुराने कार्यक्रम हैं। रोजगार पर एआई के प्रभाव के बारे में बात करते हुए मूर्ति ने कहा कि तकनीकी उन्नति नौकरियों को प्रभावित करने के लिए बाध्य है, लेकिन अगर इसे सहायक तरीके से लागू किया जाए तो यह आर्थिक विकास को गति दे सकती है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने उनके हवाले से कहा, हर प्रौद्योगिकी में कुछ नौकरियां समाप्त हो जाएंगी, लेकिन अगर सहायक तरीके से उपयोग किया जाए, तो हम अर्थव्यवस्था को बढ़ा सकते हैं। उन्होंने कहा, उदाहरण के लिए, अगर आप परिवहन, अस्पताल देखभाल के लिए वाहनों में एआई का उपयोग करते हैं, तो इससे उन कंपनियों का विस्तार होगा और नौकरियां पैदा होंगी।
