केंद्रीय कैबिनेट ने रेलवे के विस्तार और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। इस बाबत पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स (CCEA) ने बुधवार को पांच राज्यों में तीन बड़े मल्टी-ट्रैकिंग रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन परियोजनाओं पर कुल 10,783 करोड़ रुपये खर्च होंगे और रेलवे नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।
केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव (PTI Photo/Kamal Kishore)
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद इन परियोजनाओं की जानकारी दी। प्रस्तावित प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग हिस्सों को कवर करेंगे। इन्हें 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
तीन बड़े रेल प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मंजूर परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागदेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं। इन अतिरिक्त रेल लाइनों के बनने से व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि इससे रेल परिचालन ज्यादा सुचारु होगा और ट्रेनों की विश्वसनीयता में भी सुधार आएगा। मल्टी-ट्रैकिंग से मौजूदा मार्गों पर भीड़ और परिचालन संबंधी दबाव कम करने में मदद मिलेगी।14 जिलों के 4,790 गांवों को मिलेगा फायदा
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इन परियोजनाओं का विस्तार पांच राज्यों के 14 जिलों तक होगा। सरकार के अनुसार करीब 4,790 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा। इन गांवों में लगभग 56 लाख की संयुक्त आबादी रहती है। परियोजनाओं से यात्रियों के साथ-साथ माल ढुलाई को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर कोयला, सीमेंट, लौह अयस्क और स्टील जैसे भारी माल की आवाजाही के लिए इन रेल मार्गों की क्षमता बढ़ाई जाएगी।हर साल 27 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में करीब 27 MTPA (मिलियन टन प्रति वर्ष) की बढ़ोतरी हो सकती है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही को गति मिलेगी। सरकार का मानना है कि रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ने से लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और सड़क परिवहन पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी।12 करोड़ लीटर तेल की बचत का अनुमान
अश्विनी वैष्णव ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय फायदे भी गिनाए हैं। अनुमान के मुताबिक, इन रेल परियोजनाओं से करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है। साथ ही लगभग 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है।
पर्यटन और तीर्थस्थलों की कनेक्टिविटी भी सुधरेगी
इन रेल परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच भी बेहतर होने की उम्मीद है। इनमें बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, अमरकंटक, अचानकमार टाइगर रिजर्व और तारातरीणी मंदिर समेत क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण स्थल शामिल हैं। सरकार ने इन परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान के तहत मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य रेल कनेक्टिविटी को सड़क और अन्य परिवहन माध्यमों के साथ बेहतर तरीके से जोड़कर देश में मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूत करना है।
