बीजेपी ने बंगाल चुनाव में अवैध प्रवास को सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बनाया है। पार्टी का आरोप है कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ पर राज्य सरकार ने आंखें मूंद रखी हैं। बीजेपी नेताओं का दावा है कि सत्ता में आने पर केंद्र और राज्य सरकार मिलकर इस मुद्दे पर सख़्त कार्रवाई करेंगे।
ममता सरकार के खिलाफ बीजेपी का निर्णायक अभियान (फाइल फोटो:PTI)
पार्टी यह भी आरोप लगाती है कि पश्चिम बंगाल देश का इकलौता राज्य है, जहाँ रोहिंग्या शरणार्थियों को संरक्षण मिल रहा है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य के अनुसार, यह केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि राज्य की जनसांख्यिकीय संरचना से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार पर हमला
बीजेपी का दूसरा बड़ा चुनावी मोर्चा कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि राज्य में अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हुई है और महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं। प्रधानमंत्री और कई केंद्रीय नेताओं ने बंगाल की स्थिति को ‘महाजंगलराज’ तक करार दिया है।
इसके साथ ही भ्रष्टाचार को भी बीजेपी ने प्रमुख हथियार बनाया है। शिक्षक भर्ती घोटाला, कोयला घोटाला और अवैध रेत खनन जैसे मामलों को पार्टी चुनावी मंच से जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है। बीजेपी का दावा है कि भ्रष्टाचार बंगाल में अब अपवाद नहीं, बल्कि सिस्टम का हिस्सा बन चुका है। बंगाल चुनाव के सह-प्रभारी विप्लव देव का कहना है कि पार्टी इन मुद्दों को जनता के बीच तथ्यों के साथ रखेगी।
संगठन और सामाजिक समीकरण पर खास जोर
तीसरा बड़ा फोकस संगठनात्मक मजबूती और सामाजिक समीकरणों पर है। बीजेपी बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने में जुटी है। पार्टी की रणनीति में हिंदू मतदाताओं को एकजुट करना तो है ही, साथ ही मुस्लिम वोट बैंक में भी सेंध लगाने की कोशिश शामिल है।
हालिया मस्जिद विवाद के बाद मंदिर का मुद्दा उठना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व मानता है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों के जरिए सत्ता-विरोधी माहौल को और धार दी जा सकती है।
सभी पत्ते खोल चुकी है बीजेपी
कुल मिलाकर, ‘मिशन बंगाल 2026’ के तहत बीजेपी ने अपने सभी चुनावी पत्ते खोल दिए हैं। अवैध प्रवास, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और संगठनात्मक मजबूती—इन पाँच सूत्रों के जरिए पार्टी ममता बनर्जी के मजबूत गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है।
अब सवाल यही है कि क्या यह रणनीति 2026 के विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन की जमीन तैयार कर पाएगी या नहीं। इसका फैसला बंगाल की जनता चुनावी रण में करेगी।
