महिला के रोने मात्र से दहेज उत्पीड़न का मामला नहीं बनता, दिल्ली हाई कोर्ट की अहम टिप्पणी

निचली अदालत ने यह कहते हुए अभियुक्तों को बरी कर दिया था कि मौत निमोनिया के कारण हुई थी। उच्च न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण निमोनिया बताया गया है, न कि क्रूरता।

Delhi High Court: दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा है कि केवल इस तथ्य से कि एक महिला रो रही थी, दहेज उत्पीड़न का मामला नहीं बन सकता। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने यह टिप्पणी एक व्यक्ति और उसके परिवार को क्रूरता एवं दहेज उत्पीड़न के आरोपों से मुक्त करने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए की। अभियोजन पक्ष के अनुसार महिला का उसके पति और ससुराल वालों ने उत्पीड़न किया और दहेज की मांग की। महिला का विवाह दिसंबर 2010 में हुआ था।

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दिल्ली हाई कोर्ट की दहेज मामले में टिप्पणी (PTI)

इसलिए कि महिला रो रही थी, दहेज उत्पीड़न का कोई मामला नहीं बनता

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