Barakah Nuclear Facility Drone Attack: संयुक्त अरब अमीरात के बरकाह परमाणु संयंत्र पर हुए हमले की भारत ने कड़ी निंदा की है। इस घटना पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत संयुक्त अरब अमीरात के बरकाह परमाणु संयंत्र पर हुए हमले से बेहद चिंतित है। इस तरह की कार्रवाई अस्वीकार्य है और एक खतरनाक स्थिति को जन्म देती है। हम तत्काल संयम बरतने और संवाद एवं कूटनीति की ओर लौटने का आह्वान करते हैं। बता दें कि हाल में भारत और यूएई के बीच कई अहम समझौतों पर सहमति बनी है जिसने पाकिस्तान, सऊदी अरब और ईरान जैसे देशों को चौकन्ना कर दिया है।
UAE परमाणु प्लांट पर हमला
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी स्थित बराका परमाणु संयंत्र में ड्रोन हमले के बाद भीषण आग लग गई। बताया जा रहा है कि अल-धफरा क्षेत्र में स्थित इस परमाणु संयंत्र के एक इलेक्ट्रिल जनरेटर में ड्रोन स्ट्राइक की वजह से आग भड़क उठी है।
अबू धाबी के मीडिया ऑफिस ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में बताया कि पावर प्लांट के भीतरी सीमा के बाहर एक इलेक्ट्रिकल जनरेटर में ड्रोन हमले की वजह से आग लग गई। इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है और रेडियोधर्मी विकिरण सुरक्षा स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।
ड्रोन हमले का जिम्मेदार कौन?
बयान में यह नहीं बताया गया कि इस संदिग्ध ड्रोन हमले के लिए कौन जिम्मेदार है? हालांकि, यह ड्रोन हमला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम जारी है, लेकिन तनाव अब भी बहुत अधिक है और इससे पश्चिम एशिया में फिर से खुला युद्ध छिड़ने का खतरा है।
पहले भी हो चुके हैं ड्रोन हमले
इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के दौरान यूएई में कई मिसाइल और ड्रोन हमले हुए हैं, जिनमें ऐसी घटनाएं भी शामिल हैं। इन हमलों को लेकर अधिकारियों ने बताया था कि मिसाइल/ड्रोन ईरान की ओर की तरफ से आए थे, जिनका निशाना ऊर्जा सुविधाएं और बुनियादी ढांचा थे।
यह घटना ऐसे समय में हुई जब यूएई एक नई पाइपलाइन परियोजना पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे इस खाड़ी देश तेल निर्यात बढ़ाने के लिए होर्मुज पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। अबू धाबी मीडिया ऑफिस के अनुसार, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान ने सरकारी तेल कंपनी ADNOC को इस परियोजना पर तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं। इस नई पाइपलाइन से कंपनी की फुजैरा के रास्ते निर्यात क्षमता दोगुनी होने की उम्मीद है और यह अगले साल से काम करना शुरू कर देगी।
पीएम मोदी का यूएई दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की UAE यात्रा भले ही छोटी रही, लेकिन इसके नतीजे बड़े और दूरगामी दिख रहे हैं। इस दौरे में ऊर्जा सुरक्षा से लेकर रक्षा सहयोग, समुद्री ढांचे, कौशल विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तक कई अहम फैसले सामने आए। खास बात यह रही कि यूएई ने भारत में 500 करोड़ डॉलर के निवेश का भी ऐलान किया, जिससे विकास, रोजगार और रणनीतिक साझेदारी को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा दांव
इस दौरे का सबसे अहम पक्ष ऊर्जा से जुड़ा रहा। भारत और यूएई के बीच स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व को लेकर सहयोग मजबूत करने पर सहमति बनी। इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी। साथ ही एलएनजी और एलपीजी की सप्लाई को लेकर सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। इसका सीधा फायदा लंबे समय तक स्थिर आपूर्ति, बेहतर भंडारण और महंगाई के दबाव को नियंत्रित करने में दिख सकता है। ऊर्जा के मोर्चे पर यह साझेदारी भारत की रणनीतिक क्षमता को और बढ़ाती है।
रक्षा सहयोग से बदलेगा रणनीतिक समीकरण
दौरे में भारत और यूएई के बीच स्ट्रैटेजिक डिफेंस पार्टनरशिप के फ्रेमवर्क पर भी सहमति बनी। यह सिर्फ कागजी समझौता नहीं, बल्कि आने वाले समय में रक्षा उद्योग, तकनीक साझा करने और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ेगा और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को भी नया आधार मिलेगा। भारत के लिए यह साझेदारी आत्मनिर्भर रक्षा विनिर्माण की दिशा में उपयोगी साबित हो सकती है।
