'लिपुलेख दर्रे' के रास्ते भारत-चीन व्यापार पर नेपाल की टिप्पणी की विदेश मंत्रालय ने निंदा की

विदेश मंत्रालय ने बुधवार को लिपुलेख दर्रे के माध्यम से भारत और चीन के बीच व्यापार फिर से शुरू करने पर नेपाल की टिप्पणी की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह के दावे अनुचित हैं और ऐतिहासिक तथ्यों और साक्ष्यों पर आधारित नहीं हैं।

भारत और चीन द्वारा लिपुलेख के माध्यम से सीमा व्यापार फिर से शुरू करने पर सहमति जताने के एक दिन बाद नेपाल ने बुधवार को कहा कि यह क्षेत्र उसका अविभाज्य हिस्सा है और इसे उसके आधिकारिक मानचित्र में भी शामिल किया गया है।नेपाली विदेश मंत्रालय ने कहा, 'नेपाल सरकार का स्पष्ट मत है कि महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी नेपाल के अविभाज्य अंग हैं। इन्हें आधिकारिक तौर पर नेपाली मानचित्र में भी दर्ज किया गया है और संविधान में भी शामिल किया गया है।'

Randhir Jaiswal

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल (फोटो:PTI)

नेपाल सरकार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे दावे 'न तो उचित हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों तथा साक्ष्यों पर आधारित हैं।'

End of Feed