मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में मझगांव बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में उचित मुआवजा और पारदर्शी पुनर्वास की मांग को लेकर ग्रामीणों का जल सत्याग्रह तीसरे दिन भी जारी है। बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे बांध के जलभराव के बीच खड़े होकर अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर उनकी मांगों की अनदेखी करने और आदिवासी परिवारों के घरों की बिजली काटने का भी आरोप लगाया है।
', मझगांव बांध परियोजना के खिलाफ उग्र हुआ ग्रामीणों का जल सत्याग्रह।
जलभराव के बीच खड़े होकर प्रदर्शन
ग्रामीणों का कहना है कि बांध परियोजना के चलते उनके घर, खेत, जमीन और पेड़-पौधे पानी में डूब चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अब तक उचित मुआवजा नहीं मिला है। प्रभावित परिवारों का आरोप है कि पुनर्वास और मुआवजे की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। अपनी मांगों की ओर सरकार और प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रदर्शनकारियों ने विरोध के अलग-अलग तरीके अपनाए। कुछ महिलाएं चिता पर लेट गईं, जबकि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सांकेतिक फांसी लगाकर अपना विरोध जताया।
'सब कुछ डूब गया, लेकिन हक नहीं मिला'
जल सत्याग्रह में शामिल एक बुजुर्ग महिला ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनके परिवार को न जमीन का उचित मुआवजा मिला और न ही मकान का। उन्होंने बताया कि उनके परिवार की जमीन डूब क्षेत्र में चली गई है और पानी घरों तक पहुंच चुका है। उनका कहना है कि परिवार में चार बेटे और बहुएं हैं, जबकि दो लड़कियां शादी योग्य हैं, लेकिन मुआवजा नहीं मिलने के कारण परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। महिला ने कहा कि जमीन जाने के बाद उनका परिवार भूमिहीन हो गया है और अब उन्हें समझ नहीं आ रहा कि आगे कहां और कैसे रहेंगे।
अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप
प्रदर्शनकारियों ने मझगांव बांध परियोजना से जुड़े प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों पर भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के गंभीर आरोप भी लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के कारण प्रभावित परिवारों को उनका हक नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि आंदोलन के तीन दिन बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से उनसे प्रभावी संवाद नहीं किया गया है। उनका कहना है कि इतने संवेदनशील मामले में अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुननी चाहिए थीं।
'परियोजना में सिर्फ घर नहीं, संविधान भी डूब रहा'
आंदोलन में शामिल एक युवा आदिवासी प्रदर्शनकारी ने कहा कि यह आंदोलन तीसरे दिन भी जारी है और महिलाएं अपने हक-अधिकार, जल-जंगल-जमीन के लिए चिता पर लेटने और फांसी का प्रतीकात्मक कदम उठाने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि देश की राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला हैं और पन्ना की कलेक्टर व एसपी भी महिलाएं हैं, फिर भी प्रभावित महिलाओं की स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि परियोजनाओं में सिर्फ लोगों के घर ही नहीं डूब रहे, बल्कि उनके अनुसार देश का संविधान और कानून भी प्रभावित हो रहा है।
'न्याय मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन'
ग्रामीणों ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रत्येक प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा और पारदर्शी तरीके से पुनर्वास की राशि नहीं मिल जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मौके पर पहुंचकर उनकी समस्याएं सुनने और मुआवजा एवं पुनर्वास प्रक्रिया को स्पष्ट करने की मांग की है।
