मणिपुर के ककचिंग बाजार में सुरक्षा बल और प्रदर्शनकारी आमने-सामने आ गए। प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा। बता दें कि दो बच्चों की मौत के खिलाफ कई लोग प्रदर्शन कर रहे थे। वे दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और पीड़ित परिवार के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।
मणिपुर के ककचिंग बाजार में सुरक्षा बल और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घटना के इतने दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन अपराधियों को पकड़ने में विफल रहा है, जिसके कारण जनता का धैर्य जवाब दे रहा है। फिलहाल ककचिंग और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि हिंसा को और अधिक फैलने से रोका जा सके।
इस घटना के खिलफ इंफाल ईस्ट के कोईरेंगई और हट्टा गोलपाटी, काकचिंग जिला और इंफाल वेस्ट जिले के मयाई लाम्बी में रात के समय रैलियां निकाली गईं।
21 लोगों को किया गया गिरफ्तार
हिंसा के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 21 लोगों को गिरफ्तार किया है। 18 अप्रैल को आयोजित इस 'मशाल रैली' के दौरान प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए थे, जिसमें सुरक्षाबलों पर पथराव किया गया और पेट्रोल बम फेंके गए। इस हमले में सीआरपीएफ की 232वीं बटालियन के तीन जवान गंभीर रूप से घायल हो गए और सुरक्षाबलों के वाहनों को भी काफी नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस के अनुसार, यह रैली हाल ही में हुए एक बम हमले के विरोध में निकाली गई थी, जिसमें दो मासूम बच्चों की जान चली गई थी।
हिंसा के साथ-साथ पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ बयान देने और हिंसा भड़काने के आरोप में इंफाल ईस्ट से एक 23 वर्षीय युवक को भी गिरफ्तार किया है, जो 'अरामबाई तेंगगोल' (AT) संगठन का सदस्य बताया जा रहा है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने या हिंसा भड़काने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
रविवार शाम को भी बम हमले के विरोध में मणिपुर घाटी के कई जिलों जैसे कोइरेंगेई, हट्टा गोलपति और ककचिंग में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को कई स्थानों पर आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा।
क्या है प्रदर्शनकारियों की मांग?
ऑल मणिपुर यूनाइटेड क्लब्स ऑर्गनाइजेशन (AMUCO) और COCOMI सहित कई प्रमुख नागरिक संगठनों ने पहाड़ी जिलों में सक्रिय कुकी उग्रवादियों के विरुद्ध तत्काल और सख्त सैन्य कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित रैलियों के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने केंद्र और राज्य सरकार पर दबाव बनाया है कि वे घाटी के नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। इन प्रदर्शनों में 2027 की जनगणना से पहले राज्य में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) लागू करने की मांग भी प्रमुखता से उठी, ताकि अवैध घुसपैठ की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
विरोध की इस लहर के केंद्र में 7 अप्रैल को बिष्णुपुर के त्रोंगलाओबी में हुआ जघन्य बम हमला है, जिसमें दो निर्दोष बच्चों की जान चली गई थी। इस घटना के बाद से ही घाटी के पांचों जिलों में तनाव व्याप्त है और लोग दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मासूमों की हत्या के जिम्मेदार उग्रवादियों पर कार्रवाई न होना प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति और बार-बार हो रहे हमलों के विरोध में जगह-जगह हो रहे इन प्रदर्शनों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं।
