पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC)में असंतोष गहराता ही जा रहा है। बड़ी संख्या में विधायकों के बागी तेवर अपनाने के बाद उसके 20 सांसदों ने भी कुछ ऐसा ही रुख अपना लिया है। इस बीच टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने मंगलवार को कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की। बीते 24 घंटे के भीतर दोनों नेताओं की यह दूसरी मुलाकात रही,जिससे विपक्षी राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
सोनिया गांधी से फिर मिली ममता बनर्जी।
सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली स्थित 10 जनपथ में हुई इस बैठक में विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की आगे की रणनीति, भाजपा के खिलाफ संयुक्त अभियान और पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सामने खड़ी राजनीतिक चुनौतियों पर चर्चा हुई। हालांकि दोनों दलों ने बैठक के बारे में आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की है।
बताया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने विपक्षी एकता को मजबूत करने पर जोर दिया और कहा कि भाजपा का मुकाबला करने के लिए सभी विपक्षी दलों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने जनता से जुड़े मुद्दों पर साझा रणनीति बनाने की भी वकालत की।
सोमवार को हुई ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भी ममता बनर्जी ने सहयोगी दलों से पुराने मतभेद भुलाकर एकजुट रहने की अपील की थी। उन्होंने नेताओं से एक-दूसरे की सार्वजनिक आलोचना से बचने को भी कहा। यह रुख उनके पिछले राजनीतिक रुख से अलग माना जा रहा है, क्योंकि 2024 लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व करने की कांग्रेस की क्षमता पर सवाल उठाए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात केवल विपक्षी एकता तक सीमित नहीं थी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी को आंतरिक बगावत का सामना करना पड़ रहा है। पार्टी के कई सांसदों द्वारा अलग समूह बनाने और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की खबरों ने टीएमसी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है।
यह बैठक तृणमूल के भीतर बगावत के मद्देनजर हो रही है, जिसमें पार्टी के कई सांसदों ने एक अलग समूह बनाने और सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के साथ जुड़ने का फैसला किया है। तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से अधिकतर ने पहले ही राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग समूह का गठन कर लिया है।
