प्रधानमंत्री आवास जैसे अति-संवेदनशील और उच्च-सुरक्षा वाले क्षेत्र में राजनीतिक प्रदर्शनों और मार्च को रोकने के लिए देशभर के सैकड़ों वकीलों ने दिल्ली पुलिस (Delhi Police) कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया है। एडवोकेट संकेत गुप्ता के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में दिल्ली पुलिस से व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने और लागू करने की मांग की गई है।
PM आवास की ओर राजनीतिक मार्च रोकने की मांग (फाइल फोटो- PTI)
सुरक्षा चिंताओं का दिया हवाला
ज्ञापन में आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल द्वारा प्रधानमंत्री आवास की ओर प्रस्तावित मार्च के कथित आह्वान का हवाला देते हुए गंभीर सुरक्षा चिंताएं जताई गई हैं। वकीलों ने कहा कि 21 जुलाई को बिना पूर्व अनुमति के हुए धरने जैसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना बेहद जरूरी है।प्रधानमंत्री आवास को देश के सबसे संवेदनशील और उच्च-सुरक्षा वाले प्रतिष्ठानों में से एक बताते हुए आशंका जताई गई कि इस तरह के राजनीतिक जमावड़े से सुरक्षा व्यवस्था पर अत्यधिक दबाव पड़ सकता है।
संविधान और कानून के प्रावधानों का उल्लेख
ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 19 (Article 19) के तहत नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार प्राप्त है और इसका पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। हालांकि, इसके साथ ही सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वकीलों ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एसपीजी (SPG) एक्ट के कानूनी प्रावधानों का उल्लेख करते हुए दिल्ली पुलिस से कानून के मुताबिक सख्त कदम उठाने का अनुरोध किया है।
वकीलों की मांगे
वकीलों ने मांग की कि प्रधानमंत्री आवास के आसपास किसी भी प्रकार की अवैध सभा, जुलूस या राजनीतिक प्रदर्शन की अनुमति न दी जाए। दिल्ली पुलिस सभी हाई-सिक्योरिटी प्रतिष्ठानों के आसपास होने वाले प्रदर्शनों को लेकर समान रूप से लागू होने वाली एक व्यापक SOP जारी करे। भविष्य में किसी भी राजनीतिक दल या संगठन द्वारा हाई-सिक्योरिटी क्षेत्रों की ओर सार्वजनिक रूप से दिए जाने वाले मार्च के आह्वान पर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए जाएं। ज्ञापन को अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मानते हुए वकीलों ने दिल्ली पुलिस से तत्काल निवारक (Preventive) कार्रवाई करने की अपील की है।
