Mahua Moitra News: 'पैसे लेकर सवाल पूछने' के मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया है। कैश फॉर क्वेरी मामले में टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित कर दिया गया। एथिक्स कमेटी की रिपोर्ट आज सदन में पेश की गई।
महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द।
महुआ मोइत्रा की लोकसभा सदस्यता रद्द
संसद की एथिक्स कमेटी ने 6-4 के अपने फैसले में उनके निष्कासन की सिफारिश की थी। अब संसद के शीतकालीन सत्र में कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश की, जिसके बाद महुआ की सदस्यता रद्द कर दी गई है। आचार समिति ने मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश की थी। आपको पूरा विवाद समझाते हैं।
खत्म हुई महुआ मोइत्रा की सांसदी?
संसद के शीतकालीन सत्र के पांचवें दिन शुक्रवार को लोकसभा की आचार समिति की वह रिपोर्ट निचले सदन में पेश की गई जिसमें 'रिश्वत लेकर सवाल पूछने' के मामले में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को सदन से निष्कासित करने की अनुशंसा की गई थी। समिति ने बीते 9 नवंबर, 2023 को एक बैठक में मोइत्रा को लोकसभा से निष्कासित करने की सिफारिश करते हुए अपनी रिपोर्ट स्वीकारी थी।
क्या है 'पैसे लेकर सवाल पूछने' का पूरा मामला?
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने वकील जय अनंत देहाद्राई के माध्यम से महुआ मोइत्रा के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को एक शिकायत भेजी थी। अपनी शिकायत में दुबे ने मोइत्रा पर अडाणी समूह एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने के लिए व्यवसायी दर्शन हीरानंदानी के इशारे पर सदन में सवाल पूछने के लिए रिश्वत लेने का आरोप लगाया। इस मामले में आचार समिति की बैठक सबसे पहले 26 अक्टूबर को हुई थी। समिति ने निशिकांत दुबे और देहाद्रई का पक्ष जाना था। इसके बाद 2 नवंबर को महुआ मोइत्रा समिति के समक्ष उपस्थित हुई थीं। समिति ने आरोपों से जुड़े सवाल मोइत्रा से पूछे। पूछताछ के बाद मोइत्रा ने कहा कि उनसे व्यक्तिगत और परेशान करने वाले सवाल पूछे गए।
सांसद के खिलाफ इस तरह की पहली कार्रवाई
इसके बाद लोकसभा की आचार समिति ने महुआ के निष्कासन की सिफारिश की और उसे निष्कासित किया गया। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लोकसभा सांसद विनोद कुमार सोनकर की अध्यक्षता में समिति ने यहां बैठक की और अपनी 479 पन्नों की रिपोर्ट को अपनाया, जिसमें सूत्रों के अनुसार, महुआ के निष्कासन की सिफारिश की गई है। यह संभवतः समिति द्वारा किसी सांसद के खिलाफ इस तरह की पहली कार्रवाई है।
