महाराष्ट्र में मुस्लिम बोर्डिंग (Muslim Boarding Kolhapur) पर अब वक्फ बोर्ड (Maharashtra Waqf Board) ने अपना दावा जता दिया है। मुस्लिम बोर्डिंग की 3500 करोड़ की संपत्ति पर राज्य वक्फ बोर्ड ने अपना दावा जताते हुए कहा कि ये संपत्ति उसकी है और यहां पर उसके नियमों का पालन होना चाहिए। इस संपत्ति पर वक्फ बोर्ड का दावा जताने के बाद से विवाद उठ खड़ा हुआ है।
मुस्लिम बोर्डिंग की जमीन पर महाराष्ट्र वक्फ बोर्ड का कब्जा (फोटो- mahawakf &Canva)
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क्या कहा वक्फ बोर्ड ने
टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार महाराष्ट्र राज्य वक्फ बोर्ड ने कोल्हापुर की मोहम्मडन एजुकेशन सोसायटी और 3,500 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अपने कब्जे में ले लिया है। मुस्लिम बोर्डिंग के नाम से मशहूर सोसायटी की स्थापना 1906 में राजश्री शाहू महाराज ने की थी। यह संस्था शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों को संचालित करने के लिए बनाई गई थी। इसे लेकर वक्फ बोर्ड ने 23 जून को सोसायटी के ट्रस्टी को आदेश जारी कर कहा कि दस्तावेजों की जांच करने पर पता चला है कि संस्था एक वक्फ संस्था है और इसकी संपत्तियां वक्फ की संपत्तियां हैं।
किस आधार पर किया दावा
वक्फ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एमबी एमबी तहसीलदार ने टीओआई को बताया- "मैं अपने सामने प्रस्तुत किए गए दस्तावेजी सबूतों से आश्वस्त था, जिससे पता चला कि मोहम्मडन एजुकेशन सोसाइटी के तहत संपत्तियां वास्तव में वक्फ संपत्तियां हैं, और उन्हें वक्फ अधिनियम, 1995 के अनुसार शासित होने की आवश्यकता है। साक्ष्यों में शाहू महाराज द्वारा जारी चार्टर (सनद) भी शामिल हैं।"
कैसे काम करता है मुस्लिम बोर्डिंग
मुस्लिम बोर्डिंग में नियमित मामलों को चलाने के लिए एक अध्यक्ष के नेतृत्व में एक पैनल होता है। संस्था का धार्मिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों पर नियंत्रण है। अधिकारियों का दावा है कि ऐसे संस्थान वक्फ बोर्ड के सख्त नियमों के कारण उसके साथ पंजीकरण कराने से कतराते हैं। वक्फ बोर्ड ने मुस्लिम बोर्डिंग को पंजीकरण प्रमाण पत्र के साथ-साथ एक पंजीकरण संख्या भी जारी की है। संस्था पहले राज्य चैरिटी आयुक्त के तहत पंजीकृत थी।
