Maharashtra farmer Suicide: महाराष्ट्र के अमरावती संभाग से देश को झकझोर देने वाले आंकड़े सामने आए हैं। अधिकारियों द्वारा शुक्रवार को जारी की गई रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल जनवरी से लेकर जून तक के शुरुआती छह महीनों में कुल 415 किसानों ने आत्महत्या कर अपनी जान दे दी। अमरावती संभाग के आयुक्तालय के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि खेती-किसानी और कर्ज के संकट से जूझ रहे इन अन्नदाताओं के लिए जून का महीना सबसे काल बनकर आया, जब महज एक महीने के भीतर 82 किसानों ने मौत को गले लगा लिया।
महाराष्ट्र में अन्नदाता का दर्द
सरकारी आंकड़ों का बारीकी से विश्लेषण करें तो पता चलता है कि यह दर्द किसी एक महीने का नहीं है, बल्कि हर महीने किसान दम तोड़ रहे हैं। संभाग में जनवरी में 62, फरवरी में 64, मार्च में 68, अप्रैल में 76 और मई में 63 किसानों ने आत्महत्या की। वहीं, अगर जिलों के हिसाब से देखें तो यवतमाल जिला (Yavatmal Farmer Suicide) इस संकट का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है, जहां सबसे ज्यादा 128 किसानों ने खुदकुशी की।
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प्रशासन ने अब तक 144 परिवारों को सरकारी मुआवजे के लिए माना पात्र
इसके बाद अकोला में 80, अमरावती में 76, बुलढाणा में 69 और वाशिम जिले में 62 किसानों ने अपनी जान गंवाई। अधिकारियों ने बताया कि इन 415 आत्महत्याओं के मामलों में से प्रशासन ने अब तक 144 परिवारों को सरकारी मुआवजे के लिए पात्र (योग्य) माना है। वहीं, 88 मामलों को नियमों के तहत अपात्र घोषित कर दिया गया है।
इसके अलावा, अभी भी 183 मामलों की गहन जांच चल रही है, जिसके बाद ही उनकी पात्रता तय होगी। प्रशासन ने जानकारी दी है कि अब तक पीड़ित परिवारों में से केवल 27 परिवारों को ही वास्तविक रूप से सरकारी सहायता पहुंचाई जा सकी है। जमीनी स्तर पर बढ़ता यह संकट यह सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर खेतों में पसीना बहाने वाला किसान इस कदर लाचार क्यों हो रहा है।
