शरद पवार की ओर से एनसीपी चीफ पद से इस्तीफा वापस लेने के साथ ही महाराष्ट्र में पांच मई, 2023 को महाड्रामे का अंत हो गया। हालांकि, मुंबई में जब पवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बात का ऐलान किया कि वह राकांपा का अध्यक्ष पद नहीं छोड़ रहे हैं, तब वहां उनके भतीजे अजित पवार नहीं थे।
पत्रकारों-राजनेताओं से लेकर सूबे के सियासी गलियारों में उनकी गैर-मौजूदगी काफी खटकी और उस पर खूब चर्चा हुई। प्रेस वार्ता में अजित की अनुपस्थिति पर हुए सवाल पर एनसीपी अध्यक्ष ने मीडिया से दो टूक कहा, "सभी लोग सभी जगहों पर नहीं हो सकते।"
पत्रकारों से वह आगे बोले कि उनके भतीजे की अनुपस्थिति पर बहुत अधिक ध्यान न दें। उन्होंने इसके साथ ही खुलासा किया कि बेटी-सांसद सुप्रिया सुले ने एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष बनने के पार्टी नेताओं के सुझाव को अस्वीकार कर दिया था। वह इस चीज के लिए तैयार नहीं हुईं।
वैसे, अजित की ओर से बाद में बताया गया कि राकांपा मुखिया बने रहने के शरद के फैसले से पार्टी कार्यकर्ताओं को ऊर्जा मिलेगी। साथ ही महा विकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन मजबूत होगा।
इस बीच, शरद ने जो कुछ भी पीसी के दौरान कहा, उससे बहुत हद तक उनके आगे के एजेंडे के संकेत मिले। वह बोले- मैं एनसीपी के लिए नए उत्साह के साथ काम करूंगा। पार्टी में उत्तराधिकार की योजना बनानी होगी। साथ ही दल में सांगठनिक बदलाव पर हम लोग ध्यान देंगे।
पवार ने कहा कि वह पार्टी में संगठनात्मक बदलाव, नयी जिम्मेदारियां सौंपने और नया नेतृत्व तैयार करने पर ध्यान देंगे। उनके अनुसार, "मैं संगठन को आगे बढ़ाने के लिए भी पूरी ताकत से काम करूंगा और हमारी विचारधारा तथा पार्टी के लक्ष्यों को लोगों तक ले जाऊंगा।"
दरअसल, शरद ने दो मई, 2023 को पार्टी का अध्यक्ष पद छोड़ने का ऐलान कर दिया था। उनकी इस घोषणा से हर कोई अचंभित रह गया था, मगर अजित उनके इस कदम का समर्थन करते दिखे थे। वैसे, पवार के मुताबिक उन्होंने अपने इस्तीफे के बारे में अजित को थोड़े संकेत दिए थे। (एएनआई, पीटीआई और भाषा इनपुट्स के साथ)
