Mahadev Online Betting Case: महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में आरोपी सौरभ चंद्राकर को भारत लाने की दिशा में बड़ी कानूनी सफलता मिली है। ओमान की राजधानी मस्कट की कोर्ट ऑफ अपील ने भारत सरकार की ओर से दाखिल प्रत्यर्पण याचिका को मंजूरी दे दी है। वहीं, अदालत ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की ओर से दाखिल प्रत्यर्पण याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, कोर्ट के आदेश के बावजूद सौरभ चंद्राकर को तत्काल भारत नहीं लाया जा सकेगा। ओमान में उसके खिलाफ फर्जी यात्रा दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़े मामले का ट्रायल पूरा होने और सजा लागू होने के बाद ही उसे भारत सौंपा जाएगा।
विदेश में छिपा था महादेव ऐप का आरोपी, पढ़ें मस्कट कोर्ट में भारत ने कैसे दी UAE को मात। फाइल फोटो।
यह फैसला 8 अक्टूबर 2026 को मस्कट कोर्ट ऑफ अपील की क्रिमिनल-ग्रिवांस सर्किट ने सुनाया। अदालत ने भारत और यूएई, दोनों देशों की प्रत्यर्पण मांगों पर एक साथ सुनवाई की थी। दोनों देश सौरभ चंद्राकर को अपने यहां ले जाकर उसके खिलाफ चल रहे मामलों में कानूनी कार्रवाई करना चाहते थे। सुनवाई के बाद अदालत ने भारत की मांग को प्राथमिकता दी।
भारत और यूएई दोनों ने मांगा था सौरभ चंद्राकर का प्रत्यर्पण
महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले में भारत सरकार ने ओमान के सामने सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण की मांग रखी थी। भारतीय एजेंसियों के मुताबिक, सौरभ ऑनलाइन सट्टेबाजी गतिविधियों और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में आरोपी है।
भारत ने ओमान और भारत के बीच 26 दिसंबर 2004 को हुए प्रत्यर्पण समझौते के तहत उसकी गिरफ्तारी और उसे भारत सौंपने की मांग की थी। इसके लिए भारत ने अदालत के सामने चार्जशीट, गिरफ्तारी वारंट, केस से जुड़े दस्तावेज और सौरभ की कथित भूमिका से संबंधित साक्ष्य पेश किए थे।
रायपुर की विशेष PMLA अदालत ने 4 सितंबर 2023 को सौरभ चंद्राकर के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। भारत में उसके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है।
दूसरी ओर, UAE ने भी सौरभ के प्रत्यर्पण की मांग की थी। दुबई पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से दाखिल याचिका में आरोप लगाया गया था कि सौरभ ने मनी लॉन्ड्रिंग से हासिल अपराध की रकम का इस्तेमाल अवैध संगठनों को वित्तीय सहायता देने के लिए किया। UAE ने अपने एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद की फंडिंग रोकने से जुड़े कानूनों के तहत कार्रवाई के लिए उसे दुबई प्रत्यर्पित करने की मांग की थी।
सौरभ ने कहा- भारतीय नागरिकता छोड़ चुका हूं, अब वानुआतु का नागरिक
मस्कट कोर्ट में सुनवाई के दौरान सौरभ चंद्राकर ने भारत और UAE, दोनों देशों को प्रत्यर्पित किए जाने का विरोध किया। उसकी ओर से दलील दी गई कि उसने साल 2020 में दुबई स्थित भारतीय दूतावास के सामने औपचारिक रूप से भारतीय नागरिकता छोड़ दी थी। उसने दावा किया कि अब वह वानुआतु (Vanuatu) का नागरिक है। सौरभ की तरफ से यह भी कहा गया कि जिन अपराधों के लिए उसका प्रत्यर्पण मांगा गया है, उनके संबंध में यह साबित नहीं किया गया कि वे संबंधित देशों की सीमा के भीतर हुए थे। उसने प्रत्यर्पण के लिए जरूरी कानूनी दस्तावेजों को भी अधूरा बताया।
इसके अलावा, सौरभ की ओर से दुबई की अपीलीय अदालत का साल 2024 का एक फैसला भी पेश किया गया, जिसमें उसे भारतीय अधिकारियों को प्रत्यर्पित नहीं किए जाने की बात कही गई थी। हालांकि, मस्कट कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने इस मामले में भारतीय दूतावास से उसकी नागरिकता को लेकर आधिकारिक जानकारी मांगी थी।
भारतीय दूतावास ने बताया- सौरभ आज भी भारतीय नागरिक
सौरभ चंद्राकर की नागरिकता का मुद्दा प्रत्यर्पण सुनवाई में अहम रहा। 16 जुलाई 2026 को हुई सुनवाई में अदालत ने मस्कट स्थित भारतीय दूतावास से यह स्पष्ट करने को कहा था कि भारतीय पासपोर्ट नंबर U3226032 रखने वाला सौरभ चंद्राकर भारतीय नागरिक है या नहीं।
इसके जवाब में भारतीय दूतावास ने 30 अगस्त 2026 को राजनयिक माध्यमों से अदालत को जानकारी दी कि सौरभ चंद्राकर भारतीय नागरिक है और भारत में प्रत्यर्पण के लिए वांछित है। अदालत ने अपने फैसले में भारतीय दूतावास के इस आधिकारिक जवाब को महत्वपूर्ण माना। कोर्ट ने कहा कि भले ही सौरभ के पास वानुआतु की नागरिकता होने की बात मान ली जाए, तब भी इससे किसी दूसरे देश में उसका प्रत्यर्पण नहीं रुकता, बशर्ते उस देश की प्रत्यर्पण से जुड़ी कानूनी शर्तें पूरी हों।
अदालत ने भारत की याचिका क्यों मंजूर की?
मस्कट कोर्ट ने ओमान के रॉयल डिक्री नंबर 4/2000 के तहत बने प्रत्यर्पण कानून के प्रावधानों पर विचार किया। अदालत के मुताबिक, भारत ने प्रत्यर्पण के लिए जरूरी दस्तावेज उपलब्ध कराए थे। इनमें सौरभ की पहचान, गिरफ्तारी वारंट, अपराध से जुड़े कानूनी प्रावधान, उपलब्ध साक्ष्य और भारत सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन शामिल थे।
भारत ने ओमान को भरोसा दिया था कि सौरभ को प्रत्यर्पित किए जाने के बाद उस पर केवल उन्हीं अपराधों में मुकदमा चलाया जाएगा, जिनके लिए प्रत्यर्पण मांगा गया है। इसके अलावा ओमान की सहमति के बिना उसे किसी तीसरे देश को नहीं सौंपा जाएगा। भारत ने निष्पक्ष सुनवाई और सौरभ को अपना बचाव करने के सभी कानूनी अधिकार दिए जाने का भी आश्वासन दिया था।
अदालत ने माना कि भारत की ओर से पेश दस्तावेज और आश्वासन ओमान के कानून के मुताबिक हैं। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध ओमान में भी कम से कम एक साल की कैद से दंडनीय है। इन्हीं आधारों पर अदालत ने भारत की प्रत्यर्पण याचिका मंजूर कर ली।
यूएई की प्रत्यर्पण याचिका क्यों हुई खारिज?
मस्कट कोर्ट ने भारत और UAE की ओर से दाखिल दस्तावेजों की तुलना की। अदालत के मुताबिक, UAE की याचिका में ओमान के प्रत्यर्पण कानून की धारा 11 के तहत जरूरी तीन महत्वपूर्ण आश्वासन शामिल नहीं थे।
UAE ने लिखित रूप से यह भरोसा नहीं दिया था कि सौरभ को प्रत्यर्पित किए जाने के बाद उस पर प्रत्यर्पण में शामिल अपराधों के अलावा किसी अन्य पुराने अपराध में मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। इसके अलावा तीसरे देश को सौंपने और निष्पक्ष सुनवाई से जुड़े जरूरी आश्वासन भी नहीं दिए गए थे।
अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि भारत की प्रत्यर्पण याचिका पहले दाखिल हुई थी और भारतीय दूतावास ने सौरभ को भारतीय नागरिक बताया था। ओमान के कानून के तहत जब एक ही आरोपी के प्रत्यर्पण की मांग एक से अधिक देश करते हैं, तो अदालत नागरिकता, अपराध की गंभीरता, अपराध की जगह और याचिका दाखिल करने की तारीख जैसे पहलुओं पर विचार कर सकती है। इन्हीं आधारों पर भारत की मांग को प्राथमिकता दी गई और UAE की याचिका खारिज कर दी गई।
फर्जी यात्रा दस्तावेजों का मामला, इसलिए अभी भारत नहीं आएगा सौरभ
मस्कट कोर्ट से भारत की प्रत्यर्पण याचिका मंजूर होने के बावजूद सौरभ चंद्राकर को तुरंत भारत नहीं लाया जा सकेगा। इसकी सबसे बड़ी वजह ओमान में उसके खिलाफ चल रहा एक अलग आपराधिक मुकदमा है।
अदालत के आदेश के मुताबिक, सौरभ पर मस्कट इंटरनेशनल एयरपोर्ट से फर्जी यात्रा दस्तावेजों का इस्तेमाल करके देश से बाहर जाने की कोशिश करने का आरोप है। यह भी आरोप है कि उसने इन्हीं फर्जी दस्तावेजों के जरिए ओमान में प्रवेश किया था।
इस मामले में उसके खिलाफ केस नंबर 14691/5100/2026 दर्ज है। उसे सीब (Seeb) प्राइमरी कोर्ट की क्रिमिनल सर्किट में ट्रायल के लिए भेजा गया है। ओमान के प्रत्यर्पण कानून की धारा 5 के मुताबिक, यदि किसी आरोपी के खिलाफ ओमान में ही किसी अन्य अपराध का मुकदमा चल रहा है, तो उस मामले के खत्म होने या सजा लागू होने तक प्रत्यर्पण टाला जा सकता है।
इसी प्रावधान के तहत मस्कट कोर्ट ने आदेश दिया कि सौरभ चंद्राकर को भारत प्रत्यर्पित किया जाएगा, लेकिन ओमान में फर्जी यात्रा दस्तावेजों से जुड़े मामले का ट्रायल पूरा होने, अंतिम फैसला आने और सजा लागू होने के बाद ही उसे भारत सौंपा जाएगा।
