Mahadev Betting App:महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में आरोपी सौरभ चंद्राकर को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सौरभ चंद्राकर की ट्रांजिट रिमांड केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। सीबीआई ने उसे अदालत में पेश कर दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी थी। ओमान से भारत लाने के बाद उसे अदालत में पेश कर सीबीआई ने दो दिन की ट्रांजिट रिमांड मांगी थी।
महादेव ऐप के प्रमोटर सौरभ चंद्राकर
सौरभ चंद्राकर को अब छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की अदालत में पेश किया जाएगा। सीबीआई उसे आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए रायपुर लेकर जाएगी।
ED के अनुरोध पर ओमान से लाया गया भारत
सौरभ चंद्राकर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अनुरोध पर ओमान से भारत प्रत्यर्पित किया गया है। वह महादेव ऑनलाइन बेटिंग ऐप मामले में आरोपी है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय और अन्य जांच एजेंसियां लंबे समय से कार्रवाई कर रही हैं।
रायपुर की अदालत में होगी पेशी
दिल्ली में ट्रांजिट रिमांड मिलने के बाद अब सौरभ चंद्राकर को रायपुर की अदालत में पेश किया जाना है। सीबीआई मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी। सौरभ चंद्राकर महादेव ऑनलाइन सट्टेबाजी मामले में दो सीबीआई केस में वांछित है। इन दोनों मामलों में CBI पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है।इसके अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक मामले में भी उसके खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की जा चुकी है।
अवैध सट्टेबाजी सिंडिकेट में शामिल था महादेव ऐप
छत्तीसगढ़ सरकार के अनुरोध पर सीबीआई ने महादेव ऑनलाइन बुक सट्टेबाजी मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच में सामने आया कि महादेव ऑनलाइन बुक देश के सबसे बड़े अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी सिंडिकेट में से एक था, जिसे भारत के बाहर से संचालित किया जा रहा था। इस सिंडिकेट के जरिए क्रिकेट, फुटबॉल, ताश के खेल और दूसरे आयोजनों पर अवैध सट्टेबाजी कराई जाती थी। इसके लिए देशभर में फ्रेंचाइजी पैनल और ब्रांच का नेटवर्क बनाया गया था। ये पैनल लोगों को अपने साथ जोड़ते थे और उनसे सट्टे की रकम जमा कराते थे।
विदेश भेजा जाता था पैसा
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि अवैध सट्टेबाजी से होने वाली कमाई को बड़ी संख्या में म्यूल बैंक खातों के जरिए इधर-उधर किया जाता था। कई स्तरों पर बैंक ट्रांजैक्शन के बाद इस रकम को हवाला नेटवर्क के जरिए विदेश भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि सिंडिकेट को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए कमाई का एक हिस्सा सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रोटेक्शन मनी के तौर पर दिया जाता था।
भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में चार्जशीट
सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988, आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी आईपीसी की धाराओं के अलावा छत्तीसगढ़ जुआ (प्रतिषेध) अधिनियम के तहत चार्जशीट दाखिल की है। सौरभ चंद्राकर को इन चार्जशीट में प्रमुख आरोपियों में शामिल किया गया है। वहीं, ईडी भारत और विदेशों में उसकी कई संपत्तियां अटैच कर चुकी है।
ओमान में पकड़ा गया था सौरभ
सौरभ चंद्राकर के खिलाफ जारी रेड कॉर्नर नोटिस के आधार पर रॉयल ओमान पुलिस ने उसे ट्रेस कर हिरासत में लिया था। इसके बाद सीबीआई और ईडी ने ओमान सरकार को उसके प्रत्यर्पण के लिए औपचारिक प्रस्ताव भेजे। इसमें आरोपी के खिलाफ जुटाए गए सबूत भी साझा किए गए।
