भारत की 3 और पांडुलिपियां UNESCO के मेमोरी रजिस्टर में हुईं शामिल, महाभारत, राजतरंगिणी-अर्थशास्त्र को मिला सम्मान

कश्मीरी इतिहासकार और लेखक कल्हण की राजतरंगिणी की मूल संरक्षित पांडुलिपि श्रीनगर स्थित ओरिएंटल रिसर्च लाइब्रेरी में रखी गई है। 12वीं सदी का दुर्लभ ऐतिहासिक ग्रंथ राजतरंगिणी संस्कृत भाषा में 1148 से 1149 ईस्वी के बीच लिखा गया था।

UNESCO memory register: यूनेस्को की एशिया-पैसेफिक मेमोरी रजिस्टर में भारत की तीन और पांडुलिपियों को शामिल किया गया है। ये पांडुलिपियां महाभारत, राजतरंगिणी एवं अर्थशास्त्र ग्रंथों की हैं। इंडोनेशिया की राजधानी जाकार्ता में आयोजित 'मेमोरी ऑफ द एशिया-पैसेफिक रिजिनल रजिस्टर' के 11वें सत्र में इन्हें शामिल करने पर फैसला हुआ। इन ग्रंथों की पांडुलिपियां शामिल करने के लिए इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द ऑर्ट्स (IGNCA) ने नामांकन तैयार किया था।

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भारत की 3 और पांडुलिपियां UNESCO के मेमोरी रजिस्टर में हुईं शामिल। तस्वीर-X/@gssjodhpur

देश के लिए बेहद गर्व का क्षण-शेखावत

केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इन ग्रंथों को यूनेस्को की सूची में शामिल किए जाने को देश के लिए बेहद गर्व का क्षण बताया। शेखावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, 'ये कालजयी रचनाएं हमारी समृद्ध परंपराओं, ऐतिहासिक अनुसंधान, दार्शनिक चिंतन और राज्य संचालन की कला का प्रतीक हैं। इनमें निहित ज्ञान आज भी पूरी मानवता को प्रेरित करता है।' इससे पहले अप्रैल 2025 में नाट्यशास्त्र और भगवद्गीता को भी यूनेस्को के मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर में शामिल किया गया था।

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