मद्रास हाईकोर्ट ने आज कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता और पत्रकार सौरव दास के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार समेत विभिन्न पक्षों को नोटिस जारी किया। याचिका में सौरव दास के कथित आपत्तिजनक बयानों को लेकर उनके सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने, उनके पासपोर्ट और आधार कार्ड रद्द करने तथा उनकी पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की गई है।
सौरभ दास के खिलाफ मद्रास हाईकोर्ट में याचिका (फाइल फोटो- PTI)
ये भी पढ़ें- अनंत सिंह जाएंगे जेल, बिहार के बाहुबली विधायक को सुप्रीम कोर्ट का आदेश- 1 दिसंबर तक सरेंडर करें
चीफ जस्टिस एसए धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी (चेन्नई), UIDAI के चेयरपर्सन, केंद्रीय गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय के सचिव, कानून एवं न्याय मंत्रालय के सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सचिव तथा X (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम के शिकायत निवारण अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने छह सप्ताह में जवाब मांगा है और मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है।
याचिका में क्या मांग की गई है?
कांचीपुरम जिले के गणेश कुमार की ओर से दाखिल याचिका में सरकार को सौरव दास और संबंधित व्यक्तियों की पृष्ठभूमि की विस्तृत, निष्पक्ष और गहन जांच कराने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता ने सौरव दास के पासपोर्ट और आधार कार्ड को रद्द करने के लिए भी आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
इसके अलावा याचिका में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सौरव दास के इंस्टाग्राम और X अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता चाहता है कि उन्हें न्यायपालिका और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणियां करने से भी रोका जाए।
याचिकाकर्ता के वकील ने क्या दलील दी?
आज सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता बी. जगन्नाथ ने कहा कि उन्होंने सौरव दास के बैकग्राउंड की जांच कराने की मांग की है। उनका आरोप था कि सौरव दास न्यायपालिका के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां कर रहे हैं।
वकील ने अदालत में कहा कि न्यायपालिका के बारे में जिस तरह से बयान दिए जा रहे हैं, वह उचित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संबंध में अधिकारियों को शिकायत दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से याचिका दाखिल की गई है। फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिका में उठाए गए आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
