देश की राजनीति में लेफ्ट हो गया LEFT, 49 साल बाद कहीं नहीं बची पार्टी, 'कम्युनिस्ट मुक्त' हुआ भारत

दशकों से केरल वामपंथी राजनीति के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित हुआ, जहां मुख्य रूप से दो मोर्चों एलडीएफ और यूडीएफ के बीच सत्ता बदलती रही है। इस प्रदेश में सत्ता से बाहर रहने के दौरान भी वामपंथियों ने एक मजबूत कैडर नेटवर्क और लगातार चुनावी उपस्थिति बरकरार रखी।

Left party: केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की हार से न सिर्फ इस प्रदेश से वामपंथी सरकार की विदाई हो गयी, बल्कि पांच दशक बाद पहली बार ऐसी स्थिति बनी जब देश के किसी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है। जिस केरल से वाम दलों ने पहली बार 1957 में सत्ता का सूर्योदय देखा था, आज वहीं से उनका सूर्यास्त हो गया। वर्ष 1957 में देश में गैर-कांग्रेसवाद को उस वक्त हवा मिली जब ईएमएस नंबूदिरीपाद की अगुवाई में पहली बार केरल में वामपंथी सरकार बनी।

cpm

केरल में सत्ता से बाहर हुआ लेफ्ट।

बंगाल में 34 साल तक सत्ता में रही

इसके बाद कम्युनिस्ट पार्टियों ने धीरे-धीरे देश के अलग-अलग हिस्सों में अपने पैर पसारे और पश्चिम बंगाल में तो 1977 से लगातार 34 वर्षों तक मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी सत्ता में रही, जहां आज वह एक विधानसभा सीट जीतने के लिए संघर्ष कर रही है। वर्ष 1977 के बाद पहली बार ऐसा होगा कि जब देश के किसी राज्य में वाम दलों की सरकार नहीं है। वर्ष 2016 से एलडीएफ द्वारा शासित केरल, आखिरी राज्य था जहां वाम दलों की सत्ता थी। इससे पहले पश्चिम बंगाल में 2011 और त्रिपुरा में 2018 में सत्ता से उसकी विदाई हुई।

End of Feed